चंडीगढ़। स्मार्ट मीटर पर लोकसभा में वीरवार को तीखी बहस हुई। चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद बिजली बिलों में भारी बढ़ोतरी का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, खासकर जहां बिजली वितरण का निजीकरण हुआ है, वहां उपभोक्ताओं के बिल चार गुना तक बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इन शहरों में चंडीगढ़ भी शामिल है जिससे आम उपभोक्ता पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।
तिवारी ने सवाल उठाया कि स्मार्ट मीटर में ऐसा कौन-सा तंत्र है जिससे अचानक बिलों में इतनी वृद्धि हो रही है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या मीटर लगाने से पहले और बाद के बिलों का कोई तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। साथ ही यह भी जानना चाहा कि निजी कंपनियों को जिम्मेदारी देने से पहले उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया गया या नहीं। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता की कमी और लगातार बढ़ते बिलों से लोग परेशान हैं, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
सरकार का जवाब: अनियमितताओं पर लगी रोक
सांसद के आरोपों पर जवाब देते हुए केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने स्मार्ट मीटर प्रणाली का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद बिजली चोरी और तकनीकी गड़बड़ियों जैसी अनियमितताओं पर काफी हद तक रोक लगी है। ऊर्जा मंत्री के अनुसार पुराने सिस्टम में बड़े पैमाने पर नुकसान होता था जिसे स्मार्ट मीटर ने नियंत्रित किया है। उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था से अब तक करीब 2600 करोड़ रुपये की बचत हुई है। साथ ही उपभोक्ताओं को सटीक बिलिंग और रीयल-टाइम निगरानी की सुविधा भी मिली है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि यदि कहीं भी गड़बड़ी या अनियमितता पाई जाती है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।