मोहाली लोक अदालत ने बिजली विभाग के खिलाफ फैसला सुनाया है। साथ ही विभाग द्वारा उपभोक्ता को भेजा गया 63 लाख 20 हजार 330 को रद्द कर दिया है। वहीं, पावरकॉम पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। पावरकॉम को उपभोक्ता को नया बिल जारी करने को कहा है। यह फैसला जज जगरूप सिंह महल की अदालत ने सुनाया। इस संबंध में ज्ञानी जैल सिंह निवासी बवेजा ने केस दायर किया था।
बवेजा ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने घर में बिजली का कनेक्शन पिता ध्यान सिंह के नाम ले रखा है। उनकी मौत हो चुकी है। प्रति महीने बिजली खपत 400 से 500 यूनिट है। बिजली का मीटर घर के बाहर लगा हुआ था। जब मीटर में खराबी आई थी तो उसने इस संबंध में बिजली विभाग को सूचित किया। इसके बाद विभग ने मीटर की एमई लैब में जांच करवाई। साथ ही उसे झूठी रिपोर्ट भेज दी। जिसमें कहा गया कि मीटर से छेड़छाड़ हुई है।
इसके बाद पावरकॉम ने 22 नवंबर 2014 को उसे उसे 63 लाख 20 हजार 330 रुपये का बिज भेज दिया। यह बिल 15-7-2014 से लेकर 22-11-2014 तक का था। इसमें बिजली यूनिट की खपत 856901 दिखाई गई थी। जबकि, शिकायतकर्ता ने बताया कि उनका मीटर खराब था। उसे गलत बिल भेजा गया है। इसके बाद पावरकॉम की तरफ से उसे बिजली का कनेक्शन काटने की धमकी दी गई। उन्होंने लोक अदालत में केस दायर किया।
बिजली चोरी के नाम पर वसूले थे 80 हजार
अदालत ने विभाग को नोटिस भेजा तो विभाग की तरफ आरोपों का खंडन किया गया। 2014 में उपभोक्ता ने मीटर की शिकायत दी थी। मीटर जांच के लिए एमई लैब भेजा गया। इसमें पता चला कि मीटर स्लो चल रहा है। साथ ही मीटर से छेड़छाड़ हुई है। ऐसे में बिजली चोरी का मामला बनता था। इसके बाद उन्होंने उसे बिजली चोरी के 80838 रुपये की मांग की और 24000 कंपाउडिंग चार्जेज के रूप में वसूल किए। यह रुपये शिकायतकर्ता ने जमा करवा दिए। वहीं, मीटर ने 856901 यूनिट की खपत बताई। इसके बाद उसे 63 लाख 20 हजार 330 रुपये का बिल भेज गया है।
ऐसे साबित हुई पावरकॉम की कहानी झूठी
अदालत ने दोनों पक्षों के मामले को मेरिट के आधार सुलझाने की कोशिश की। लेकिन, बात सिरे नहीं चढ़ पाई। इसके बाद अदालत ने कहा कि अगर शिकायतकर्ता के घर में लगा बिजली का कनेक्शन आठ किलोवाट का है। वहीं, उससे 24 घंटे बिजली बिजली पूरे घर में जलती रहती है तो भी बिजली की यूनिटों की खपत आठ लाख यूनिट नहीं पहुंच सकती है। वहीं, अदालत ने माना कि यह मीटर की खराबी है। ऐसे में यह बिल गलत भेजा गया था।