दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम अब 25 हजार रुपये से अधिक के बिल का भुगतान आरटीजीएस के जरिए करवाएगा, ताकि चेक बाउंस होने की परेशानी न हो। इस फैसले के तहत 25 हजार रुपये से ज्यादा की राशि चेक से नहीं ली जाएगी। उपभोक्ता को या तो आरटीजीएस करवाना होगा या फिर नकद भी भुगतान कर सकता है। निगम ने अपने बिलिंग साफ्टवेयर में चेक के ऑप्शन को ही बंद कर दिया है। अगर काउंटर पर बैठा कर्मचारी चेक से भुगतान करवाने का प्रयास करेगा तो उसे ऑप्शन ही नहीं दिखेगा। बिजली निगम के पुराने नियम के तहत 20 हजार रुपये तक के बिल का भुगतान नकद करवाया जा सकता था।
इससे ऊपर के बिलों के भुगतान के लिए उपभोक्ता को या तो चेक देना पड़ता था या डिमांड ड्राफ्ट देना पड़ता था। सूत्रों की मानें तो काफी बार ऐसी स्थिति होती थी कि कोई उपभोक्ता बिल की राशि का चेक दे देता था। मगर जब चेक क्लीयर करना होता तो उस समय उसके खाते में पैसे ही नहीं होते। इस कारण चेक बाउंस हो जाता। बाद में चेक बाउंस को लेकर कोर्ट में केस करने पड़ते। निगम अधिकारियों का काफी समय चेक बाउंस संबंधी कोर्ट केस में ही व्यर्थ हो जाता। इसलिए निगम प्रबंधन को चेक का ऑप्शन बंद करना पड़ा है।
एक लाख से अधिक उपभोक्ता होंगे प्रभावित
अधिकारियों की मानें तो पूरे डीएचबीवीएन में एक लाख से भी अधिक उपभोक्ता इस नए नियम से प्रभावित होंगे। अकेले हिसार में ही एक हजार से अधिक उपभोक्ता ऐसे हैं, जिनका बिल 25 हजार रुपये से अधिक आता है, जबकि गुरुग्राम, फरीदाबाद जैसे बड़े शहरों में ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या बड़े पैमाने पर हैं। खासकर इंडस्ट्रियल और कामर्शियल उपभोक्ताओं का इस श्रेणी में बिल रहता है।
यह होगा फायदा
आरटीजीएस यानी रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट बैंकों में फंड ट्रांसफर का तरीका है। इसके तहत जब पैसा प्राप्त कर लिया जाता है, तभी उसे आगे भुगतान या ग्राहक के निर्देशानुसार अन्य उपयोग के लिए दिया जाता है। इस फंड को आगे प्रक्रिया के लिए नहीं टाला जाता। इस तरह निगम को यह फायदा होगा कि उसे चेक क्लीयर करवाने में समय नहीं लगाना पड़ेगा और चेक बाउंस होने का खतरा भी नहीं रहेगा।
बिजली निगम प्रबंधन ने 25 हजार रुपये से अधिक के बिल का भुगतान आरटीजीएस या नकद रूप में करवाने का फैसला लिया है। निगम के सॉफ्टवेयर में चेक का ऑप्शन ही बंद कर दिया है। इससे चेक बाउंस संबंधी दिक्कत नहीं आएगी।
- रवि ठकराल, चीफ कम्युनिकेशन ऑफिसर, डीएचबीवीएन