कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल लौंगोवाल के बीच चुनावी समझौते की शनिवार को औपचारिक घोषणा हो गई। पीपीसीसी अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा, शिअद (ल) सुप्रीमो सुरजीत सिंह बरनाला, अध्यक्ष सुरजीत कौर बरनाला तथा प्रधान महासचिव बलदेव सिंह मान ने यहां आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में इससे संबंधित घोषणा की।
बाजवा ने कहा कि शिअद (ल) ने बिना किसी शर्त के कांग्रेस को समर्थन दिया है, जिसका वह सम्मान करते हैं। वहीं, शिअद (ल) की ओर से बलदेव सिंह मान ने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों से देश व अल्पसंख्यकों को बचाने के लिए कांग्रेस से समझौता समय की जरूरत है।
ऑपरेशन ब्लू स्टार, 1984 के सिख विरोधी दंगों आदि पर कांग्रेस के खिलाफ स्टैंड लेने वाले पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला के उसी पार्टी से हाथ मिलाने के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में बरनाला की तरफ से (उनके अस्वस्थ होने की वजह से) मान ने कहा कि यह निर्णय कुछ बातों को पीछे छोड़ देेने में ही समाज की भलाई होती है। आज परिस्थितियां यह हैं कि अल्पसंख्यक वर्ग को मोदी से खतरा महसूस हो रहा है।
यदि वह प्रधानमंत्री बन जाते हैं तो हो सकता है धर्म परिवर्तन का दौर लौट आए। इसलिए इन हालात में उन्होंने धर्म निरपेक्ष कांग्रेस को चुना है। केवल कांग्रेस ही भाजपा के सांप्रदायिक रवैये को टक्कर दे सकती है।
इस समर्थन के लिए शिअद (ल) का धन्यवाद करते हुए बाजवा ने कहा कि इस जरा से मुश्किल वक्त में वह जो साथ देने जा रहे हैं, इसे हमेशा याद रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह गठबंधन लंबा चलेगा और इसका कांग्रेस को पूरे प्रदेश में फायदा मिलेगा। संगरूर में तो शिअद (ल) का जबरदस्त प्रभाव है, जिसका भरपूर लाभ वहां से कांग्रेसी उम्मीदवार विजयइंद्र सिंगला को मिलेगा।
इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल, पीपीसीसी के पूर्व सचिव लाल सिंह, पीपीपी के प्रधान महासचिव गुरप्रीत सिंह भट्टी आदि भी उपस्थित थे। भट्ठल ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला का कद बहुत बड़ा है तथा इसका फायदा निश्चित रूप से कांग्रेस को मिलेगा।