पंजाब चुनाव आयोग ने वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए क्रिकेटर शुभमन गिल को स्टेट आइकॉन भी नियुक्त किया है। हाल ही में मुल्लांपुर क्रिकेट स्टेडियम में हुए आईपीएल मैच के दौरान उनके वोटर जागरूकता संदेश व वोट डालने की अपील को भी प्रदर्शित किया गया था।
चुनाव आयोग ने पंजाब के लोकसभा चुनाव में इस बार 70 प्रतिशत से अधिक मतदान का लक्ष्य तय किया है, जिसकी प्राप्त के लिए आयोग की तरफ से विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है। मतदाताओं को जागरुक किया जा रहा है।
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1966 में हरियाणा से अलग होने के बाद पंजाब ने अब तक 14 लोकसभा चुनाव देखें हैं। शुरुआत के दौर में शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के बीच टक्कर रहती थी, लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की एंट्री ने सबको चौंका दिया और 2022 विधानसभा चुनाव में तो पार्टी ने रिकार्ड 92 सीटों पर जीत दर्ज की। पंजाब में अगर सबसे अधिक मतदान प्रतिशत की बात की जाए तो ये 1967 के लोकसभा चुनाव के नाम ही दर्ज है। तब सबसे अधिक 71.1 फीसदी मतदान हुआ था।
मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए स्वीप प्रोग्राम के तहत भी आयोग की तरफ से अलग-अलग प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं और नुक्कड नाटक व प्ले के जरिए भी लोगों को मतदान के अधिकार के प्रति जागरुक किया जा रहा है।
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सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड सिमरनजीत सिंह मान के नाम
पंजाब लोकसभा चुनाव में सबसे कम मतदान का रिकार्ड वर्ष 1991 के नाम दर्ज है। उस चुनाव में सिर्फ 24 फीसदी ही मतदान हुआ था। तब आतंकवाद के कारण मतदान बहुत कम हुआ था। अगर सबसे बड़ी जीत के बारे में बात की जाए तो यह रिकॉर्ड 1989 में शिअद (अमृतसर) के सिमरनजीत सिंह मान के नाम है, जिन्होंने तरनतारन सीट पर 4, 80,417 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
सीपीआई के तेजा सिंह 1971 में सबसे कम अंतर 210 मतों से जीते थे
1971 लोकसभा चुनाव में सीपीआई के उम्मीदवार तेजा सिंह संगरूर सीट से सबसे कम अंतर मात्र 210 मतों से जीते थे। 2019 लोकसभा चुनाव में भी काफी रोचक नतीजे सामने आए थे। 2019 लोकसभा चुनाव में फिरोजपुर सीट से शिअद उम्मीदवार सुखबीर सिंह बादल ने कांग्रेस उम्मीदवार शेर सिंह को सबसे बड़े अंतर 198850 मतों से मात दी थी। इसी तरह जालंधर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार संतोख सिंह चौधरी ने शिअद उम्मीदवार चरणजीत सिंह अटवाल को सबसे कम अंतर 19491 मतों से दी मात दी थी।