नामांकन पत्र वापस लेने के बाद चुनाव निशान अलॉट करते समय चुनाव आयोग के एक फैसले पर विवाद खड़ा हो गया।
पीपीपी-कांग्रेस के सांझे उम्मीदवार मनप्रीत सिंह बादल ने आरोप लगाया कि आयोग ने उनकी पीपीपी पार्टी के चुनाव निशान रहे पतंग को जानबूझकर एक मनप्रीत नाम के आजाद उम्मीदवार को अलॉट कर दिया और चुनाव अधिकारी ने पंजाब सरकार के दबाव में आकर उसे सरनेम बादल भी दे दिया है। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि पीपीपी के नाम पर पड़ने वाली वोटों को बांटा जा सके।
आयोग पर सरकार का दवाबः मनप्रीत
मनप्रीत बादल ने बताया कि पतंग चुनाव निशान पर पीपीपी ने पिछला विधानसभा चुनाव लड़ा था। जबकि उस व्यक्ति के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे वह यह साबित कर सके कि उसके नाम के साथ बादल लगता है।
मनप्रीत बादल ने कहा कि उन्होंने चुनाव अधिकारी को अपना पासपोर्ट, पैन कार्ड और आधार कार्ड दिखाया था जिसमें मेरे नाम के साथ बादल लगा हुआ है पर इसके बावजूद पंजाब सरकार के दबाव में चुनाव अधिकारी ने उक्त आजाद कैंडिडेट मनप्रीत को सरनेम बादल और चुनाव चिन्ह पतंग साजिश के तहत जारी किया है।
बादल परिवार की हार यकीनी
मनप्रीत बादल ने कहा कि मुख्यमंत्री, उपमुख्ममंत्री और हरसिमरत कौर बादल ने अपनी हार को यकीन में बदलते हुए देखकर घटिया हथकंडे इस्तेमाल करने शुरू कर दिए हैं पर उनको बठिंडा के लोगों पर विश्वास है कि वह बादल परिवार के इस गुमराह करने वाली चाल में न आकर उन्हें भारी बहुमत से जीत दिलाएंगे।
मनप्रीत बादल ने कहा कि वह इसकी शिकायत मुख्य चुनाव अधिकारी को कर आजाद उम्मीदवार के तौर पर खड़े हुए मनप्रीत को सरनेम और जारी चुनाव निशान को रद्द करने की मांग करेंगे।