चंडीगढ़। जिला अदालत ने एक बुजुर्ग एनआरआई को ड्रग के झूठे केस में फंसाकर तीन लाख रुपये ठगने के मामले में आरोपी महिला रजनी उर्फ रिया की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि जमानत देने से केस की जांच प्रभावित हो सकती है। इस मामले में यूटी पुलिस का कांस्टेबल बलविंदर भी आरोपी है। पुलिस पूछताछ में सामने आया था कि बलविंदर सिंह को उसके दोस्त ड्रग डीलर राजवीर सिंह उर्फ गौरव का फोन आया था। उसने ही बलविंदर को उसकी दोस्त रिया और हरिंदर कौर की मदद कर शिकायतकर्ता पर एनडीपीएस का ट्रैप लगाने को कहा था ताकि रकम वसूली जा सके।
अगस्त में सेक्टर-17 थाना पुलिस ने बुजुर्ग एनआरआई जसपाल सिंह चीमा की शिकायत पर मामला दर्ज किया था। वह इसी साल अमेरिका से मई में भारत आए थे। 18 जुलाई को शिकायतकर्ता अपनी महिला मित्र हरिंदर कौर (सह-आरोपी) के साथ सेक्टर-22 में शॉपिंग के लिए आए थे। यहां से जाते हुए रात करीब 9:40 बजे यूटी पुलिस का कांस्टेबल बलविंदर सिंह (सह-अरोपी) पार्किंग में खड़ी उनकी कार के पास आया। उसने कहा कि कार की तलाशी लेनी है, सूचना है कि इसमें ड्रग है। आरोपियों ने कथित रूप से एक ब्लैक पॉलीथिन प्लांट करके दावा किया कि कार में ड्रग है। इसी दौरान बिना वर्दी के सिविल कपड़ों में आया कांस्टेबल बलविंदर अपने मोबाइल से मौके पर कार की वीडियो बनाने लगा था।तभी शिकायतकर्ता बुजुर्ग को झूठे केस में फंसाने के नाम पर सात लाख रुपये मांगे गए थे। हरिंदर कौर ने साजिशन रिया को मदद के लिए बुलाया और उसके साथ रिया का बहनोई करण सिंह (सह-आरोपी) भी पहुंच गया। इसके बाद डील तीन लाख रुपये में तय हुई थी।