पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ व उत्तराखंड में आधार कार्ड और अन्य फर्जी दस्तावेज के आधार पर मोबाइल फाइनेंस करवाने के बाद उसे लोगों को बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के आठ सदस्यों के खिलाफ सीजेएम अक्षदीप महाजन की कोर्ट ने आरोप तय कर दिए हैं।
आरोपियों में मोहाली फेज-6 निवासी संजीव कुमार (मुख्य सरगना), पंचकूला निवासी शक्ति सिंह, हरियाणा के कैथल निवासी विशाल सहगल, कजेहड़ी निवासी आशीष कुमार, हिमाचल के ऊना निवासी अमित कुमार, मोहाली निवासी कपिल ढींगरा, बलदेव सिंह और सेक्टर-38 वेस्ट निवासी राजो शामिल हैं। सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा-419, 420, 467, 468, 471, 474 और 120बी के तहत 17 अगस्त से ट्रायल शुरू होगा।
इससे पहले सेक्टर-17 थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अप्रैल में चार्जशीट दायर की थी। 777 पेज की चार्जशीट में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ 37 गवाह बनाए हैं। इनमें कई दुकानदार और फाइनेंस कंपनी के लोग भी बतौर गवाह शामिल हैं।
क्राइम ब्रांच की टीम ने उक्त आरोपियों को इसी साल 19 जनवरी को सेक्टर-17 बस स्टैंड के पास पुरानी जिला अदालत की पार्किंग से गिरफ्तार किया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि बस स्टैंड के पास फर्जी पैन कार्ड, आधार कार्ड के जरिए फाइनेंस करवाकर मोबाइल खरीदने वाले घूम रहे हैं। सूचना के अधार पर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ था कि गिरोह के सदस्य पहले फर्जी दस्तावेज जैसे आधार, पैन कार्ड आदि तैयार करते थे। इसके बाद ये इन दस्तावेजों के आधार पर मोबाइल स्टोर से चंद हजार रुपये की डाउन पेमेंट कर मोबाइल फाइनेंस करवाते थे। मोबाइल खरीदने के बाद ये लोग अलग-अलग राज्यों में जाकर मोबाइल महंगे रेट पर बेच डालते थे।
इस मामले में सबसे अहम बात यह थी कि जिन लोगों की आईडी के आधार पर फर्जी आधार कार्ड या फिर पैन कार्ड बनाते थे, फाइनेंस कंपनियां उनके खाते से पैसे काटती थी। वहीं, पैसे न देने पर वह उन्हें डिफाल्टर लिस्ट में डाल देती थी, जबकि उन्होंने कोई मोबाइल फाइनेंस ही नहीं करवाया था।