चंडीगढ़। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को केंद्र सरकार ने पास कर दिया है। माना जा रहा है कि यह शिक्षा नीति इसी नए सत्र से लागू होगी। ऐसे में पीयू को भी अपने कई प्लान को बदलना होगा। साथ ही शिक्षा नीति की गाइडलाइन को फोलो करना होगा। चाहे व डिग्री कोर्सेज के लिए हों या फिर डिप्लोमा कोर्सेज के लिए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद शिक्षण संस्थान उसको पढ़ने में लगे हुए हैं। कई बड़े बदलाव किए गए हैं। सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों की पढ़ाई गुणवत्ता एक जैसी कर दी गई है। डिग्री कोर्सेज की सीमा बढ़ाई गई है। एमफिल की प्रक्रिया को दूर किया गया है। पीएचडी करने के मानक तय हुए हैं। प्लेसमेंट के तौर तरीकों को भी बदलना होगा।
पीयू के कुछ शिक्षकों का कहना है कि नई शिक्षा नीति इसी सत्र से लागू हुई तो पीयू को भी एक कमेटी बनानी पड़ेगी और सभी नियमों को ध्यान में रखकर योजना बनानी होगी। पढ़ाई करवाने से लेकर रिजल्ट तक जारी करने की योजनाओं के बारे में सोचना होगा। शिक्षकों का यह भी कहना है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों व निजी शिक्षण संस्थानों की तरह ही यहां भी गवर्निंग बॉडी हो सकती है। सिंडिकेट व सीनेट का री-फार्म हो सकता है। हालांकि इसके नियम अभी सामने नहीं आए हैं। कुछ जानकार नीति को पढ़ने में जुटे हैं।