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Chandigarh: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने पंजाब में दी दबिश, चंडीगढ़ की फार्मा कंपनी से जुड़ा है मामला

Fri, 15 Dec 2023 01:34 PM IST
निवेदिता वर्मा पीटीआई, चंडीगढ़

सार

केंद्रीय एजेंसी ने पहले पैराबोलिक ड्रग्स के प्रमोटरों विनीत गुप्ता (54) और प्रणव गुप्ता (56) (सोनीपत स्थित अशोक विश्वविद्यालय के सह-संस्थापक) और सीए सुरजीत कुमार बंसल (74) को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था।  
 
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ईडी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चंडीगढ़ की फार्मास्युटिकल कंपनी पैराबोलिक ड्रग्स और उसके प्रमोटरों के खिलाफ 1,626 करोड़ की कथित बैंक धोखाधड़ी व मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर और पंजाब में लगभग एक दर्जन स्थानों पर छापे मारे। इस मामले में पहले भी अक्तूबर में कार्रवाई की गई थी। 

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तलाशी के दौरान एजेंसी के अधिकारियों को कुछ दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बरामद हुए, जिन्हें जब्त कर लिया गया। केंद्रीय एजेंसी ने पहले पैराबोलिक ड्रग्स के प्रमोटरों विनीत गुप्ता (54) और प्रणव गुप्ता (56) और सीए सुरजीत कुमार बंसल (74) को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था। विनीत गुप्ता और प्रणव गुप्ता सोनीपत स्थित अशोका विश्वविद्यालय के सह-संस्थापक भी हैं। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने हाल ही में उन्हें न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया था।

सीबीआई ने 2021 में दर्ज किया था मामला

सीबीआई ने 2021 में 1,626 करोड़ रुपये के बैंक ऋण धोखाधड़ी में कथित संलिप्तता के लिए विनीत गुप्ता व प्रणव गुप्ता और कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद गुप्ता ने 2022 में अशोक विश्वविद्यालय में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। ईडी ने पिछले साल जनवरी में उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। 

एजेंसी ने अक्तूबर में अदालत को बताया कि कंपनी के दो गिरफ्तार निदेशक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण या वित्तीय सुविधाएं प्राप्त करके बैंकों को धोखा देने में सक्रिय रूप से शामिल थे। इसमें आरोप लगाया गया कि दोनों ने जानबूझकर ऋण निधि को देनदारियों से परिसंपत्तियों में बदल दिया और अपने समूह की कंपनियों के मंच का उपयोग करके उक्त धनराशि को डायवर्ट किया। इसके लिए दोनों ने शेल कंपनियों का सहारा लिया।

गलत प्रमाण पत्रों की मदद से लिया लोन

एजेंसी के अनुसार सीए सुरजीत बंसल ने अपनी चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म एसके बंसल एंड कंपनी के माध्यम से पैराबोलिक ड्रग्स लिमिटेड को गलत प्रमाणपत्र जारी किए, जिनका इस्तेमाल बैंकों से ऋण लेने के लिए किया गया था। ईडी ने तीनों के रिमांड की मांग करते हुए अदालत को बताया कि उनकी अवैध गतिविधियों और ऋण निधि के दुरुपयोग के कारण सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और अन्य कंसोर्टियम बैंकों को 1,626.7 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

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