प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब में 1200 करोड़ के सिंचाई घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ठेकेदार गुरिंदर सिंह की 70.15 करोड़ की चल-अचल संपत्ति और बैंक खातों में पड़ी 41.50 करोड़ की नकदी अटैच की। ईडी ने जो संपत्तियां अटैच की हैं, उनमें 27 प्रॉपर्टी चंडीगढ़ और पंजाब के शहरों में स्थित हैं।
ईडी के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस मामले में दर्ज एक प्राथमिकी और सिंचाई घोटाले के लिए चालान के आधार पर हुई जांच के तहत कार्रवाई की गई है। सिंचाई विभाग में यह घोटाला करीब 11 साल पहले हुआ था। उस दौरान राज्य में शिरोमणि अकाली दल व भाजपा गठबंधन की सरकार थी। 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार में विजिलेंस ब्यूरो ने इस घोटाले का पर्दाफाश किया था।
गुरविंदर का ऐसा रसूख, टेंडर भी शर्तों के मुताबिक होते थे
ईडी की जांच में गुरविंदर सिंह के रसूख का भी पता चलता है। उसका इतना सिक्का चलता था कि पंजाब में विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के टेंडर आमंत्रित करने के लिए नोटिस भी गुरिंदर सिंह की पात्रता शर्तों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता था।
ईडी के प्रवक्ता के मुताबिक गुरिंदर सिंह को लाभ पहुंचाने के मकसद से परियोजना कार्यों के आवंटन और निष्पादन के संबंध में कई अनियमितताएं भी देखी गईं, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। इस संबंध में ईडी ने पीएमएलए के प्रावधानों के तहत अपनी जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान ईडी ने गुरिंदर सिंह के स्वामित्व वाली चल संपत्तियों (बैंक बैलेंस के रूप में) की पहचान की। इनमें ज्यादातर बैलेंस भ्रष्टाचार से अर्जित आय का हिस्सा थी।
विजिलेंस ने नए सिरे शुरू की जांच
पंजाब में आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद सिंचाई घोटाले की अब नए सिरे से जांच शुरू हो गई। वहीं, ईडी भी अपने स्तर पर जांच कर रही है। विजिलेंस अब तक कई तत्कालीन मंत्रियों और अफसरों से पूछताछ कर चुकी है। अभी भी पूछताछ का क्रम जारी है। इनमें रिटायर आईएएस सर्वेश कौशल, केबीएस सिद्धू और काहन सिंह पन्नू शामिल हैं।
अकाली नेता जनमेजा सिंह सेखों और शरणजीत सिंह ढिल्लों से सवाल जवाब हुए। विजिलेंस की जांच अभी चल रही है। अभी तक किसी को केस में नामजद नहीं किया गया है। सूत्रों का दावा है कि जल्द ही इस मामले में कुछ नामचीन लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।