प्री फेयर में मेले की तैयारियां की जाएंगी। टीचरों की देखरेख में बच्चे गणित विषय की कोई एक्टिविटी या मॉडल प्रदर्शित करेंगे। इसके लिए स्कूल प्रिंसिपल आखिरी के तीन पीरियड निर्धारित करेंगे। साथ ही बच्चों की जरूरत की चीजें भी मुहैया कराएंगे। इस एक्टिविटी में लगने वाले समय का खासतौर पर निरीक्षण किया जाएगा। मेले वाले दिन प्रिंसिपल ही इलाके के गणमान्य लोगों, अभिभावकों, एसएमसी मेंबरों और दूसरी कक्षाओं के बच्चों को आमंत्रित करेंगे। सभी प्रिंसिपल, फैकल्टी और जिला शिक्षा अफसर विभिन्न स्कूलों में जाकर मेलों का निरीक्षण करेंगे।
संख्या के हिसाब से बनेंगे ग्रुप
स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से उनके ग्रुप बनाए जाएंगे। मिडिल ग्रुप में छठी, सातवीं और आठवीं का एक-एक बच्चा होगा। हाई स्कूल ग्रुप में नौवीं और दसवीं के एक-एक बच्चे को लिया जाएगा। अध्यापकों से कहा गया है कि वे बच्चों को घर में पड़े पुराने गत्ते के डिब्बे, ऊन, बटन, कैंची, चार्ट आदि लाने को प्रेरित करें। मेले में आने वाले लोगों को बच्चे अपने मॉडल के बारे में पूरी जानकारी देंगे। मेले में आने वाले लोगों से फीडबैक के लिए अलग से बोर्ड और चार्ट का प्रबंध किया जाएगा।