पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 3 प्रतिशत कम। यह शहर की सेहत के लिए अच्छे संकेत हैं। दरअसल, अप्रैल महीने में प्रशासन को सिर्फ 14 करोड़, मई महीने में 42 करोड़, जून में 73 करोड़, जुलाई में 109 करोड़, अगस्त में 139 करोड़ और सितंबर में 141 करोड़ का जीएसटी कलेक्शन हुआ था। अप्रैल और मई महीने में सभी तरह की आर्थिक गतिविधियां बंद रहीं, जिसकी वजह से टैक्स कलेक्शन में भारी कमी आई। गौरतलब है कि जीएसटी पेट्रोल और शराब को छोड़कर अन्य पर वसूला जाता है।
जून के बाद से लगातार बेहतर हो रही स्थिति
शहर की अर्थव्यवस्था जून महीने के बाद से सुधरने लगी थी। अप्रैल और मई महीने में लगे संपूर्ण लॉकडाउन की वजह से चंडीगढ़ प्रशासन को टैक्स कलेक्शन में 342 करोड़ का घाटा हुआ था। हालांकि, इसके बाद केंद्र सरकार ने अनलॉक की प्रक्रिया को शुरू कर दिया। इससे शहर में बंद पड़ी फैक्ट्रियां एक फिर चलनी शुरू हुईं। रियायतों से साथ व्यापार भी धीरे-धीरे बढ़ने लगा और स्थितियां सामान्य होने लगीं। इसका असर जीएसटी संग्रह पर भी देखने को मिला।
नाम न छापने की शर्त पर प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि स्थितियां काफी बेहतर हो गई हैं और नवंबर महीने में पिछले साल से भी ज्यादा जीएसटी संग्रह की उम्मीद है। गौरतलब है कि पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा ने जीएसटी के संग्रह में पिछले साल के मुकाबले बढ़ोतरी दर्ज की है।
पंजाब में अक्तूबर 2019 में 1189 करोड़ वसूले थे, जबकि इस साल 1376 करोड़ एकत्रित किए हैं, यह पिछले साल से 16 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं हरियाणा ने अक्तूबर 2019 में 4578 करोड़ वसूले थे, जबकि इस साल 5433 करोड़ एकत्रित किए हैं, यह पिछले साल से 19 प्रतिशत ज्यादा है।
- अप्रैल 14 करोड़
- मई 42 करोड़
- जून 73 करोड़
- जुलाई 109 करोड़
- अगस्त 139 करोड़
- सितंबर 141 करोड़
- अक्तूबर 152 करोड़