छोटे उद्यमियों को समय पर भुगतान नहीं करने वाले कॉरपोरेट कंपनियों पर सरकार की टेढ़ी नजर है। इन कंपनियों को अब 45 दिन में छोटे उद्यमियों को भुगतान करना होगा। ऐसा नहीं करने वाली कंपनियों को कॉरपोरेट मंत्रालय के समक्ष छमाही रिटर्न फाइल करनी होगी। रिटर्न फाइल करते समय उन्हें यह बताना होगा कि उन पर छोटे उद्यमियों का कितना बकाया है और अभी तक इसका भुगतान क्यों नहीं किया गया। सरकार इस संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी कर चुकी है। इस नोटिफिकेशन के बाद बड़ी कंपनियों पर छोटे उद्यमियों को समय पर भुगतान करने का दबाव बढ़ेगा।
प्रभावित हो रहे छोटे उद्योग
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय (एमएसएमई) के साथ वर्तमान में 6.50 करोड़ छोटे उद्यमी जुड़े हैं, जो किसी-न-किसी तरह बड़ी कंपनियों को सेवाएं दे रहे हैं। पंजाब में ही चार लाख ऐसे छोटे उद्यमी हैं, जिनका कारोबार समय पर भुगतान नहीं होने से प्रभावित हो रहा है। एमएसएमई एक्ट के अनुसार, कंपनी को सेवाएं लेने पर 60 दिन के अंदर भुगतान करना होता है। लेकिन कई मामलों में बड़ी कंपनियां छोटे उद्यमियों को समय पर भुगतान नहीं कर रही हैं। इसका सीधा असर लघु उद्योग पर पड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर सोनीपत स्थित एक बड़ी साइकिल कंपनी को लुधियाना के करीब 400 छोटे उद्यमी माल सप्लाई कर चुके हैं, लेकिन बीते कई वर्षों से उन्हें भुगतान नहीं किया गया है। इस कारण उन उद्यमियों को अपने-अपने कारोबार बंद करने की नौबत आ चुकी है।
तिमाही की जाए रिटर्न फाइल की अवधि
फेडरेशन ऑफ स्मॉल इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रधान बदीश जिंदल का कहना है कि सरकार का यह नोटिफिकेशन लघु उद्योग के लिए लाभदायक साबित होगा। उनका कहना है कि एमएसएमई एक्ट में 60 दिन के अंदर भुगतान का नियम है, इसलिए रिटर्न फाइल करने की अवधि छमाही से घटाकर तिमाही की जाए। साथ ही सरकार समय पर भुगतान नहीं करने वाली कंपनियों का नाम सार्वजनिक करे ताकि छोटे उद्यमी उनके चंगुल में न फंस सकें। इससे न सिर्फ छोटे उद्यमियों को फायदा होगा बल्कि यह भी पता चल सकेगा कि लघु उद्योग में विकास क्यों नहीं हो रहा है।
सरकार के कदम से घटेगा बैंकों का एनपीए
एमएसएमई लुधियाना के निदेशक मेजर सिंह का कहना है कि इन कंपनियों से समय पर भुगतान नहीं मिलने से छोटे उद्यमी बैंकों का लोन समय पर नहीं चुका पा रहे हैं। इससे बैंक का एनपीए भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस नोटिफिकेशन के आने से छोटे कारोबारियों को समय पर भुगतान मिल सकेगा। इससे न सिर्फ छोटे उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि छोटे उद्यमियों द्वारा बैंकों का लोन समय पर चुकाने से एनपीए भी कम होगा।