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स्कूली किताबों से प्राइवेट पब्लिशर्स और स्कूलों को करोड़ों की कमाई

Sat, 16 Apr 2016 01:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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भारी स्कूल बैग - फोटो : amar ujala
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शहर के प्राइवेट स्कूलों द्वारा अभिभावकों को  सिलेबस में मनमाने ढंग से प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। 80 से अधिक प्राइवेट स्कूलों में 2 लाख से अधिक बच्चों की किताबों से प्राइवेट पब्लिशर्स ने करोड़ों की कमाई की है। कमाई का बड़ा हिस्सा प्राइवेट स्कूलों की झोली में भी जाता है। पूरे मामले में अभिभावकों ने डायरेक्टर स्कूल एजुकेशनल, शिक्षा सचिव और सीबीएसई अधिकारियों से लिखित शिकायतें कीं।
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इसके बावजूद अधिकारी आंखें बंद करके बैठे हैं। यूटी प्रशासन के अधिकारियों की प्राइवेेट स्कूल प्रबंधकों के सामने ऐसी हालत हो गई है कि वे उनकी शिकायत करने का मन बनाकर दिल्ली गए, लेकिन मीटिंग में ऐसा दबाव पड़ा कि अफसरों की जुबान तक नहीं खुली। पूरे मामले को लेकर शहर के लोगों में खासा रोष है। अगले हफ्ते विभिन्न संस्थाओं से जुड़े अभिभावक मामले की शिकायत एडवाइजर परिमल राय और प्रशासक प्रो.कप्तान सिंह सोलंकी को देने की तैयारी में हैं। 

17 मार्च 2016 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अप्रैल 2016 से सभी स्कूलों में सिर्फ एनसीईआरटी किताबें लागू करने के आदेश दिए थे। लेकिन मामले में यूटी प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।  
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एनसीईआरटी किताबें पढ़कर सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट का शानदार प्रदर्शन
शहर के प्राइवेट स्कूलों द्वारा प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें सिलेबस में शामिल करने के कई कारण बताए जा रहे हैं। कई स्कूल प्रिंसिपलों का कहना है कि  मार्केट में एनसीईआरटी किताबों उपलब्ध नहीं होने के कारण प्राइवेट पब्लिशर्स की पुस्तकें लेनी पड़ती हैं। जबकि कुछ स्कूल प्रिंसिपल प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों में किसी विषय की विस्तार से जानकारी को विद्यार्थियों के लिए लाभदायक होने का तर्क दे रहे हैं। उधर, शहर के सभी सरकारी स्कूलों में एनसीईआरटी किताबें पढ़ाई जाती हैं। हर साल बोर्ड कक्षाओं की मेरिट लिस्ट में शहर के सरकारी स्कूलों के बच्चों का भी शानदार प्रदर्शन रहता है। 
 
क्या विभाग कर पाएगा कार्रवाई 
दिल्ली में एमएचआरडी और सीबीसीएसई अधिकारियों के साथ मीटिंग से लौटे शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले में प्रशासन अपने स्तर पर कार्रवाई करेगा। शिक्षा सचिव सर्वजीत सिंह का कहना है कि अगले हफ्ते तक नियमों को तोड़ने वाले प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी स्कूलों की मान्यता तक रद्द करने की बात कह रहे हैं, लेकिन अब तक का रिकार्ड है कि हर बार अधिकारियों से सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे हैं। 
 
प्राइवेट स्कूलों से प्रशासन के अधिकारियों की मिलीभगत  
प्राइवेट स्कूलों द्वारा चंडीगढ़ प्रशासन से बिना अनुमति माइनॉरिटी स्टेटस लेने के मामले में वरिष्ठ वकील पंकज चांदगोठिया ने शिक्षा विभाग को लीगल नोटिस भेजा है। अमर उजाला से बातचीत में पंकज ने कहा कि माइनॉरिटी स्टेटस लेकर प्राइवेट स्कूल खुद को शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र से खुद को बाहर रखने की कोशिश कर रहे हैं।

आरटीई लागू होने के बाद ही कई बड़े स्कूलों ने माइनारिटी स्टेटस लिया है। लेकिन स्टेटस लेने में भी इन स्कूलों ने नियमों का उल्लंघन किया है। स्कूलों के लिए जमीन देने वाले चंडीगढ़ प्रशासन से पहले प्राइवेट स्कूलों को माइनॉरिटी स्टेटस के लिए क्लीयरेंस सर्टिफिकेट लेना जरूरी है। पूरे मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मंशा भी ठीक नहीं लगती है। चंडीगढ़ प्रशासन को इस पूरे मामले में कड़े कदम उठाने चाहिए। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी से भविष्य में गरीब बच्चों के लिए पढ़ाई असंभव हो जाएगी। 

 रूबिंदरजीत सिंह बराड़ ,डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन चंडीगढ़  ने बताया कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को लेकर शिक्षा विभाग नियमों के भीतर ही कार्रवाई कर सकता है। निजी पब्लिशर्स की किताबें सिलेबस में लगवाने और कैंपस में ही किताबें खरीदने को मजबूर करने वाले स्कूलों के खिलाफ प्रशासन जल्द सख्त कदम उठाएगा। इस मामले में अगले हफ्ते उच्च अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। प्राइवेट स्कूलों से भी इस संबंध में उनकी प्रतिक्रिया के लिए मीटिंग बुलाई जाएगी।
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