फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: पहले चौखट पर इंतजार, अब वीडियो कॉल में बसता है अपनापन

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। पहले मां बच्चों के लौटने का इंतजार दरवाजे पर खड़े होकर करती थी, अब मोबाइल स्क्रीन पर ऑनलाइन का हरा निशान देखकर सुकून ढूंढती है। समय बदला, बच्चे पढ़ाई और नौकरी के लिए विदेश चले गए लेकिन मां ने भी हार नहीं मानी। बच्चों से जुड़े रहने के लिए उन्होंने स्मार्टफोन चलाना सीखा, वीडियो कॉल करना सीखा, चैटिंग करना सीखा और अब हर सुबह व्हाट्सएप पर गुड मॉर्निंग बेटा भेजना... उनकी दिनचर्या बन चुका है।
विज्ञापन


स्वास्थ्य विभाग में सीनियर नर्सिंग ऑफिसर हरजीत कौर बंगू का बेटा गुरजशनप्रीत सिंह बंगू 2015 से ऑस्ट्रेलिया में इंजीनियर हैं। बेटे के विदेश जाने के बाद हरजीत कौर ने खुद को तकनीक से जोड़ा। शुरुआत में सिर्फ कॉल करना आता था, लेकिन जब कई बार बेटा काम में व्यस्त होने के कारण फोन रिसीव नहीं कर पाता था तो उन्होंने चैटिंग सीख ली। धीरे-धीरे वीडियो कॉल, फोटो भेजना और मोबाइल के दूसरे फीचर भी सीख गईं। अब दिन की शुरुआत बेटे की तस्वीर देखकर और रात वीडियो कॉल पर हालचाल लेकर खत्म होती है।
मोबाइल मां और बच्चों के रिश्ते का सबसे भावुक पुल

जीएमएसएच- 16 की सीनियर नर्सिंग ऑफिसर शोभना पठानिया की भी ऐसी ही कहानी है। उनका बेटा नव करन सिंह पिछले पांच साल से न्यूजीलैंड में कंप्यूटर इंजीनियर है जबकि बेटी नंदिनी सात साल से वहीं रह रही हैं। बच्चों की दूरी ने शोभना को भी डिजिटल दुनिया से दोस्ती करना सिखा दिया। उन्होंने वीडियो कॉल, चैटिंग और इंस्टाग्राम तक चलाना सीख लिया ताकि बच्चों की जिंदगी से जुड़ी रह सकें। शोभना बताती हैं कि तकनीक ने भले ही दूरियां बढ़ाई हों, लेकिन मां के प्यार को और मजबूत कर दिया। अब मोबाइल सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि मां और बच्चों के रिश्ते का सबसे भावुक पुल बन चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें