चंडीगढ़। मां शायद दुनिया का एकमात्र रिश्ता है, जो बिना किसी शिकायत के पूरी जिंदगी अपनों के लिए जीता है। जब कुछ महिलाओं से पूछा गया कि उन्होंने आखिरी बार अपने लिए क्या खरीदा था या कब कहीं घूमने गई थीं, तो कई पलभर के लिए खामोश हो गईं। मानो उन्होंने वर्षों से अपने बारे में सोचना ही छोड़ दिया हो। कुछ महिलाओं ने मुस्कुराते हुए कहा कि अब बच्चों और परिवार की खुशी ही उनकी अपनी खुशी बन गई है।
सेक्टर-22 निवासी और सेक्टर-20 के स्कूल में अध्यापिका प्रवीण कुमारी ने कहा कि पहले अपने लिए कपड़े और छोटी-छोटी चीजें खरीदने का मन करता था लेकिन बच्चों की पढ़ाई और घर की जरूरतों के आगे खुद की इच्छाएं पीछे छूट गईं। अब बच्चों के चेहरे की मुस्कान ही उन्हें सुकून देती है।
पंजाब यूनिवर्सिटी के यूबीएस विभाग की चेयरपर्सन डॉ. परमजीत कौर बताती हैं कि पिछले तीन साल से वह कहीं घूमने नहीं जा पाईं। नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों में वक्त निकल गया। उन्होंने कहा कि मां बनने के बाद औरत अपने सपनों से ज्यादा परिवार के सपनों को जीने लगती है। शायद यही मां होती है...जो अपने हिस्से की खुशियां चुपचाप परिवार के नाम कर देती है।