अब केयू शिक्षक संघ शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की अवधि 65 वर्ष करने के लिए लामबंद हो गया है। गौरतलब है कि प्रदेश में कर्मचारियों की सेवानिवृति की आयु 60 साल करने की घोषणा के बाद केयू शिक्षक संघ ने भी अपनी मांग मनवाने के लिए रणनीति बनाना शुरू कर संघ के नेताओं का कहना है कि संघ काफी समय से शिक्षकों की सेवानिवृत्ति को 65 करने की मांग कर रहा है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
केयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रदेश के हजारों शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार किया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षकों को आश्वासन देने के बाद भी उनकी मांगों को पूरा नहीं किया। कुटा अध्यक्ष ने बताया कि सरकार के इस भेदभाव कि कारण हरियाणा के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षकों में भारी रोष है।
कुटा उपाध्यक्ष डॉ. विजेंद्र बजार्ड ने कहा कि शिक्षकों की मांगों को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार ने हमेशा ढुलमुल की नीति अपनाई है।
जिससे शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होेंने कहा कि शिक्षक संघ ने प्रदेश स्तर पर जल्द ही सरकार के खिलाफ मुहिम चलाने का फैसला लिया है।
कुटा सचिव डॉ. अवनीश वर्मा ने कहा कि यूजीसी द्वारा 30 जून 2010 के जारी छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप पूरे देश में यूनिवर्सिटी व कॉलेज शिक्षकों की आयुसीमा 65 वर्ष तय की है। जिसे देश के कई प्रदेशों ने लागू कर दिया है।
वर्मा के मुताबिक हरियाणा सरकार ने कुलपतियों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा तो 65 से 68 वर्ष कर दी है व स्वास्थ्य विश्वविद्यालय रोहतक के शिक्षकों की आयुसीमा 65 वर्ष कर दी है।
लेकिन प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों शिक्षकों की आयु सीमा भी 60 वर्ष है। जिसे शिक्षक सहन नहीं करेंगे। उन्हें आंदोलन करना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे।
इस मौके पर कुटा खजांची डॉ. कर्मबीर सिंह्र पूर्व कुटा सचिव डॉ. परमेश कुमार, डॉ. सतीश चौहान, पुर्व सहसचिव डॉ. सुरेंद्र कुमार, डॉ. संतोष दुबे, डॉ. संजीव गुप्ता, डॉ. जसविंद्र सिंह, डॉ. बीएल सैनी, डॉ. कामराज सिंधु, डॉ. महावीर सिंह रंगा उपस्थित रहे।