झे पेट में पथरी है। ड्यूटी के दौरान दर्द रोकने के लिए पेन किलर लेता था। आइसोलेशन वार्ड में खाली पेट घंटों ड्यूटी करने पर कई बार भयंकर दर्द होने लगता था, लेकिन मैं इससे जरा भी डरा नहीं और अपनी ड्यूटी पूरी की। यह कहना है सेक्टर 32 स्थित जीएमसीएच के नर्सिंग स्टाफ सुरज्ञान यादव का, जिन्होंने जीएमसीएच के कोरोना वार्ड में ड्यूटी कर क्वारंटीन की समय सीमा पूरी कर ली है। अब अस्पताल प्रशासन ने इनकी आईसीयू में ड्यूटी लगाई है।
सपना था कुछ खास करने का
सुरज्ञान का कहना है कि नर्सिंग की ड्यूटी शुरू करने से पहले हमेशा ये सोचता था कि काश मुझे भी कभी कुछ ऐसा करने का मौका मिले जिसे लोग याद रखे। कोरोना महामारी के दौरान कोरोना के मरीजों के बीच ड्यूटी की तो एहसास हुआ कि ये काम आसान नहीं था। किसी भी पल कोरोना की चपेट में आ सकता था।
लेकिन मैंने सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए पूरी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी पूरी की। पीपीई किट पहनने और उसे उतारने की सही जानकारी ली और उसके अनुसार प्रक्रिया पूरी की। सच कहूं तो आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी करने के बाद अब ये लगने लगा है कि मैंने अपने पेशे के साथ इंसाफ किया है।
ड्यूटी के बाद भी हैं परिवार से दूर
कोरोना वार्ड में ड्यूटी लगने से पहले ही सुरज्ञान ने अपने परिवार को जयपुर पहुंचा दिया था। पत्नी संपत्ति और दोनों बेटे कार्तिक व कुणाल अपने दादा-दादी के पास हैं। सुरज्ञान ने ड्यूटी के बाद क्वारंटीन का समय भी पूरा कर लिया है। लेकिन लॉकडाउन के कारण अपने परिवार से नहीं मिल पा रहे हैं। इनका कहना है कि अब कोरोना पर जीत दर्ज करके ही परिवार के साथ इकट्ठे खुशियां मनाऊंगा।