एक लाख रुपये वेतन वाली नौकरियों में तो ये प्रतिशत एक से भी नीचे है। राज्य के युवाओं की प्रतिभा, कौशल और परिश्रम में कोई कमी नहीं है। रोजगार में आरक्षण कानून हरियाणा के लिए समय की जरूरत व प्रदेश का हक है। यह युवाओं को सामाजिक और आर्थिक न्याय प्रदान करेगा।
संविधान के किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करता नया कानून
उन्होंने कहा कि कुछ लोग 75 प्रतिशत आरक्षण अधिनियम की सांविधानिकता पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन हरियाणा स्टेट एम्प्लॉयमेंट ऑफ लोकल कैंडिडेट एक्ट पूर्ण रूप से सांविधानिक है और संविधान के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करता। संविधान का अनुच्छेद 16 सिर्फ राज्य सरकार के अंतर्गत आने वाली नौकरियों में निवास स्थान के आधार पर आरक्षण देने पर पाबंदी लगाता है, न कि निजी रोजगार पर।
संविधान के अनुच्छेद 21 में रोजगार को एक मौलिक आधार माना गया है और राज्य सरकार की ये सांविधानिक जिम्मेदारी है कि वो रोजगार देने के लिए कानून बनाएं। इस कानून से कंपनियों, उद्योगों, अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि 75 प्रतिशत आरक्षण अधिनियम को सभी उद्योगपतियों, कंपनियों आदि से आठ दौर की चर्चा के बाद सहमति से ड्राफ्ट किया गया है।