इंडियन नेशनल लोकदल में चल रहे घमासान के बीच हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला उग्र हो गए हैं। पहली बार खुल कर विपक्ष के नेता एवं अपने चाचा अभय चौटाला को निशाने पर लेते हुए दुष्यंत ने जयचंद का हवाला दिया।
दुष्यंत ने कहा कि पार्टी में बैठे जयचंद ने उन्हें निष्कासित करने की रणनीति बनाई और पार्टी पदाधिकारियों को राह दिखाई। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता के तौर पर चुन कर विधानसभा में गए इनेलो के लोग वहां जाकर भाजपा की भाषा बोलते हैं।
यहां शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में दुष्यंत चौटाला ने कहा कि संसदीय दल के नेता के नाते लोकसभा में मैने किसानों, नौकरियों में भ्रष्टाचार, छात्रसंघ चुनाव समेत कई मुद्दे उठाकर सरकार को घेरने का प्रयास किया है।
दूसरी तरफ विधानसभा में कभी भी ऐसे मुद्दे नहीं उठाए गए। विधानसभा में कई बार ऐसा प्रतीत होता है कि विपक्ष भी भाजपा की बोली बोल रहा है। मेरे पिता अजय सिंह चौटाला ने पिछले चालीस वर्षों से जिन कार्यकर्ताओं को पार्टी के साथ जोड़ा था।
उन्हें पिछले चार साल से अपमानित किया जा रहा है। संसदीय दल का नेता होने के बावजूद उन्हें व अन्य कई साथियों को न तो कभी पार्टी की बैठकों की सूचना दी गई और न ही किसी फैसले में उनकी सहमति ली गई। दुष्यंत ने कहा कि पार्टी में एक व्यक्ति द्वारा लिए गए फैसलों के बारे में उन्हें मीडिया के माध्यम से ही पता चलता था।
बादल परिवार भी मध्यस्थता में लगा
इनेलो के सुख-दुख साथी रहे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश बादल भी इस पारिवारिक लड़ाई को खत्म करवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं, लेकिन उनके पुराने सियासी पैंतरे अभी तक कारगर साबित नहीं हुए हैं। परिवार में रार बरकरार है। दीपावली की रात भी बादल की अजय ओर अभय दोनों से बात हुई लेकिन बातचीत सिरे नहीं चढ़ी।
परमिंदर ढुल भी दुष्यंत खेमे में पहुंचे
जुलाना से विधायक परमिंदर ढुल भी चार घंटे की मैराथन बैठक के बाद दुष्यंत के खेमे में शामिल हो गए हैं। हालांकि ढुल ने इसे महज शिष्टाचार मुलाकात बताया है। विधायक राजदीप फौगाट और अनूप धानक पहले ही दुष्यंत के साथ आस्था जता चुके हैं।
विधायक नागेंद्र भड़ाना भी लंबे समय से दूरी बनाए हैं। विधायक पिरथी नंबरदार भी दुष्यंत साथ आ गए हैं। दुष्यंत खेमे में विधायकों की बढ़ रही संख्या को देखते हुए यह कहना गलत नहीं है कि 17 नवंबर तक कुछ विधायक और पाला बदल सकते हैं।
हमें चक्रव्यूह भेदना आता है
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि हमें समय का रुख भांपना आता है। कुछ लोगों ने अभिमन्यु समझ कर यह समझ लिया था कि हम फंस जाएंगे, लेकिन हमें कांटो पर चलना आता है। मैं पंद्रह वर्ष की उम्र से यही सब देख रहा हूं। लिहाजा हमें चकव्यूह भेदना भी आता है।