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Chandigarh News: त्योहारी मौसम में घर में होने पर ही जलाएं दीएं, अगरबत्ती-पटाखे जलाने पर साथ रखें पानी की बाल्टी

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चंडीगढ़। त्योहारी मौसम में हर्षोल्लास के साथ आग लगने के खतरे भी बढ़ जाते हैं। पिछले साल दिवाली के समय शहर में 60-70 आग लगने की घटनाएं हुईं और 100 से अधिक लोग जख्मी हुए। ऐसे में त्योहार मनाते समय ध्यान रखें कि दीया, मोमबत्ती, धूप-अगरबत्ती तब ही जलाएं जब खुद मौजूद हों और पटाखे जलाते समय साथ में पानी की बाल्टी रखें। छात्रों को संबोधित करते यह बात राम दरबार के फायर स्टेशन ऑफिसर नरेश कुमार ने कही। शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 स्थित गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम का आयोजन किया गया। फायर स्टेशन ऑफिसर नरेश कुमार कार्यक्रम में मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने छात्रों को आग लगने पर बचाव के तरीकों, भिन्न तरह की आग और उसे बुझाने के बारे में बताया। उनकी टीम से फायरमैन चनप्रीत सिंह, मंजुल कुमार और शुभम ने आग को बुझाने के लिए फायर एक्सटिंगविशर को प्रयोग करने का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। प्रधानाचार्य अनीता धवन भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं।
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आग को तीन श्रेणी में किया गया है
नरेश कुमार ने छात्रों को बताया कि आग को तीन श्रेणी में विभाजित किया गया है। घास-फूस, लकड़ी पर लगने वाली आग टाइप ए, ईंधन पर लगने वाली आग टाइप बी और गैस से लगने वाली आग टाइप सी होती है। टाइप ए आग को पानी से, टाइप बी को फायर एक्सटिंगविशर या किसी चीज से ढक देने से बुझाया जा सकता है। गैस से लगने वाली आग सबसे खतरनाक होती है। घर पर कभी गैस सिलेंडर लीक करने पर कभी भी कोई भी इलेक्ट्रिक स्विच को ऑन ऑफ न करें और न ही उसके नजदीक फोन का प्रयोग करें। हो सके तो उसे कपड़े से ढक दें और इमरजेंसी नंबर 112 पर संपर्क करें।
इन्हें जलाने में बरतें सावधानी
त्योहारी मौसम में आग की अधिक दुर्घटनाएं होती है जिन्हें थोड़ी सावधानी बरतने से कम किया जा सकता है। अपने घर में दिया, मोमबत्ती और अगरबत्ती को बेड, बिस्तर और अन्य जलने वाली चीजों से दूर जलाएं। इन्हें तब तक ही जलाएं जब तक आप घर पर हों। पटाखे जलाते समय कम से कम एक मीटर की दूरी बनाए रखें और माचिस की जगह फुलझड़ी का इस्तेमाल करें। आग की कोई भी दुर्घटना होने पर इमरजेंसी को सही और सारी जानकारी दें ताकि वह अपना बचाव अभियान बेहतर से कर पाएं।
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आग बुझाते समय देख लें कौन सा फायर एक्सटिंग्विशर प्रयोग में
आग की श्रेणी के आधार पर फायर एक्सटिंगविशर भी टाइप ए, बी और सी तरह के होते हैं। फायरमैन शुभम ने छात्रों को टाइप ए और टाइप सी फायर एक्सटिंगविशर प्रयोग करने का लाइव प्रदर्शन किया। साथ ही छात्रों को दुर्घटना होने की स्थिति में खुद का और अन्य का बचाव करने के बारे में बताया।

बच्चों से सवाल जवाब
कार्यक्रम के दौरान अग्नि सुरक्षा से जुड़े सवालोंं का सही जवाब देने वाले, सबसे पहले प्रश्न पूछने वाले और फायर एक्सटिंग्विशर का प्रयोग करने के बारे में बताने पर पांच छात्रों को पुस्तक देकर सम्मानित किया। इनमें 12वीं कक्षा के आर्यन, अस्मित, नंदिनी, नीरज और गुरप्रीत शामिल हुए। नीरज ने प्रश्न किया कि शॉर्ट सर्किट होने पर क्या करना चाहिए। फायरमैन चनप्रीत सिंह ने बताया शॉर्ट सर्किट होने पर मेन स्विच को बंद कर दें जिससे तार में लगी आग वहीं थम जाएगी। अगर आग का अधिक खतरा हो तो खुद सुरक्षित हों, वहां से बाहर निकल कर इमरजेंसी नंबर और अन्य को सूचित करें। टाइप सी आग को कैसे बुझाना चाहिए पूछे प्रश्न का आर्यन ने सही जवाब दिया। आर्यन ने बताया टाइप सी आग को बुझाने के लिए स्टारवेशन मेथड का इस्तेमाल करेंगे, आग के आस-पास की ज्वलनशील वस्तुओं को दूर करेंगे ताकि आग आगे न फैले। नंदिनी ने गैजेट गर्म होने के पूछे सवाल पर एफएसओ ने कहा कि चार्जिंग के समय फोन का प्रयोग अपडेट या अन्य चीजों के लिए न करें।
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