चंडीगढ़ में डिस्कोथेक और क्लबों के बाहर गोलीबारी, मारपीट और गुंडागर्दी से शहरवासियों में जबरदस्त रोष है। लोग मान रहे हैं कि चंडीगढ़ वैसा नहीं रहा, जो दस साल पहले हुआ करता था। छीनाझपटी, गैंगवार जैसी कोई वारदात पहले नहीं होती थी। बीते चार से पांच सालों से यहां पर पंजाब व यूपी का कल्चर आ गया है, जिससे लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। लोगों का कहना है कि पुलिस को अपने कामकाज में बदलाव लाने की जरूरत है। बड़े अपराधियों की धड़पकड़ जरूरी है। यदि ऐसा नहीं होगा तो यह शहर भी रहने लायक नहीं बचेगा।
जनता में विश्वास बनाए रखने के लिए करनी होगी कार्रवाई
चंडीगढ़ में गुंडागर्दी बढ़ने से लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। चंडीगढ़ की गिनती शांत शहरों में की जाती थी लेकिन आए दिन हो रही वारदातों ने शहर की शांति भंग कर दी है। पुलिस न तो झपटमारी पर लगाम लगा पाई है और न ही गैंगवार पर। जनता का भी पुलिस पर से विश्वास उठ गया है। अब पुलिस को कड़ी कार्रवाई होगी, ताकि गुंडों बदमाशों पर सख्त संदेश जाए।
- संजीव चड्डा, जनरल सेक्रेटरी, व्यापार मंडल
पुलिस को अब ज्यादा स्मार्ट होने की आवश्यकता
चंडीगढ़ पुलिस को अब स्मार्ट होने की जरूरत है। विकसित देशों में इलेक्ट्रानिक निगरानी द्वारा यातायात को नियंत्रित किया जाता है। जहां बड़ी आपराधिक घटनाओं की आशंका रहती है, वहां पर पुलिस अपने मानव संसाधन का प्रयोग करती है। चंडीगढ़ पुलिस को भी यही प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता है। साथ ही यह भी देखना होगा कि क्या आबादी के हिसाब से चंडीगढ़ पुलिस के पास पर्याप्त संख्या कर्मचारी हैं या नहीं। यदि पुलिसकर्मी कम हैं तो उसे भी बढ़ाने की जरूरत है।
- दीपक जुगरान, रिसर्च स्कालर, पीयू
क्लबों की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत
शहर की अधिकतर घटनाएं क्लब के बाहर हुईं हैं या अंदर। ऐसे में क्लब की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। जिसके क्लब में गोली चले या झगड़ा हो, उस क्लब का लाइसेंस रद्द कर देना चाहिए तभी ऐसी घटनाएं रुकेंगी। साथ ही पुलिस को भी सख्ती बरतनी की जरूरत है। पुलिस को समय-समय पर क्लबों की जांच करनी चाहिए। गुंडे पिस्टल लेकर क्लब में जा रहे हैं, उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। पुलिस जब तक सख्त नहीं होगी, तब तक अपराध नहीं रुकेंगे।
- प्रिंस भंढुला, समाजसेवी चंडीगढ़
रात में पेट्रोलिंग बढ़ाने की जरूरत
चंडीगढ़ में रात के वक्त पुलिस की पेट्रोलिंग न के बराबर है। इससे अपराध बढ़ रहे हैं, जबकि रात के वक्त पुलिस की ज्यादा जरूरत है। जिन इलाकों में क्लब है, वहां पर पुलिस को समय-समय पर चेकिंग अभियान भी चलाना चाहिए। आने जाने वाले वांछित लोगों की तलाशी लें। जब इस तरह की प्रैक्टिस होगी, तभी चंडीगढ़ का क्राइम रुकेगा।
- जसवीर सिंह, जनरल सेक्रेटरी, नेशनल पैरा लीगल वॉलंटियर