शून्यकाल के दौरान मजीठिया ने सदन में कहा कि वे जगतार सिंह और उनके पुत्र किरपाल सिंह द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों एक किल्ला जमीन के मालिक थे लेकिन उनका कर्ज माफ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में दोनों ने मूर्ख बनाने और धोखा देने के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह और पीपीसीसी अध्यक्ष को दोषी ठहराया है।
उन्होंने आगे कहा कि इस पिता-पुत्र ने किसी साहूकार या बैंक से कर्ज नहीं लिया था, बल्कि इन पर समिति का कर्ज बाकी था। उन्होंने कहा कि अफसोस की बात है कि सोसायटी के कर्ज के कारण पिता-पुत्र को आत्महत्या करनी पड़ी जबकि कैप्टन ने एलान किया था कि किसानों द्वारा समितियों से लिया गया कर्ज माफ कर दिया जाएगा।
मजीठिया की इस मांग पर कांग्रेस सदस्यों ने एतराज जताया लेकिन मजीठिया पर अपनी बात पर डटे रहे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने वादा किया था कि किसानों का समितियों से लिया गया पूरा कर्ज माफ होगा। उन्होंने आगे कहा कि सूबे में अब तक 1500 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
चीमा ने उठाया जेसीटी कंपनी की जमीन बेचने का मामला
आप विधायक और नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने मोहाली में जेसीटी कंपनी बंद होने और उसकी जमीन निजी डीलरों को बेचे जाने का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि अफसरों की मिलीभगत से राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया है। उन्होंने जमीन की इस डील को घोटाला करार देते हुए सरकार से जांच कराने की मांग की। चीमा ने कहा कि कंपनी की जमीन मात्र 92 करोड़ रुपये में निजी डीलरों को बेच गई जबकि इस जमीन की कीमत 400 करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि सीधे तौर पर सरकार को 325 करोड़ रुपये का चूना लगा है।