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Haryana: हरियाणा में बड़ा मुद्दा बन रहा ‘नशा’, कांग्रेस-इनेलो सरकार पर हमलावर, भाजपा कार्रवाई गिना रही

Wed, 17 Apr 2024 02:46 PM IST
निवेदिता वर्मा सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

नशे का मुद्दा खासकर पंजाब और राजस्थान के साथ लगते हरियाणा के लोकसभा क्षेत्रों में अधिक प्रभावी है। इनमें हिसार, सिरसा, भिवानी-महेंद्रगढ़ अंबाला और कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र आते हैं। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के साथ लगते करनाल, सोनीपत, फरीदाबाद व गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्रों में भी नशीले पदार्थ काफी बिक रहे हैं।
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हरियाणा में बढ़ रहा नशा - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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जित दूध दही का खाणा, वह मेरा हरियाणा के नाम से पहचान बनाने वाले प्रदेश की आज की तस्वीर काफी डरावनी है। आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। प्रदेश के कुल 22 जिलों में 16 जिले बुरी तरह से नशे की चपेट में हैं और ये जिले नशे के हॉट स्पाट बन चुके हैं।

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हरियाणा में इस बार लोकसभा चुनाव में नशे का फैलता जाल भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इसकी गंभीरता इतनी है कि यह मुद्दा सभी राजनीतिक दलों के सिर चढ़कर बोल रहा है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक मंचों से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी लग रहे हैं। कांग्रेस और इनेलो बढ़ते नशे को लेकर सरकार पर हमलावर हैं, वहीं सत्ताधारी दल भाजपा नशा तस्करों पर कार्रवाई को अपनी उपलब्धि बता रही है। चुनावी गर्मी में नशे के दलदल पर हरियाणा के सभी राजनीतिक दल खुलकर मुखर हो रहे हैं।

पिछले पांच सालों की बात करें तो हरियाणा में नशा तस्करों पर कार्रवाई तो जरूर हुई है, लेकिन नशे के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे। नशे की ओवरडोज से एक के बाद एक युवाओं की मौत हो रही है।
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गंभीर बात ये है कि शहरों के साथ अब गांवों में भी सिंथेटिक नशा पहुंच गया है। नशे पर लगाम लगाने के लिए हरियाणा सरकार ने नारकोटिक्स ब्यूरो का गठन किया है, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद नशे की चेन टूट नहीं पा रही। इसके अलावा नशा बढ़ने का एक बड़ा कारण यह भी है कि नशा छोड़ने के लिए प्रदेश में कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। 

नशा मुक्ति केंद्रों के हालात भी खराब हैं और प्रदेश में मनोचिकित्सकों की संख्या भी कम है। इसको विपक्षी दल कांग्रेस और इनेलो खासतौर पर मुद्दा बना रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा विधानसभा में नशे के मामले पर सरकार को घेरते रहे हैं। वहीं, इनेलो के विधायक अभय सिंह चौटाला नशे को लेकर विधानसभा से लेकर सड़क तक सरकार पर हमलावर हैं। इनके अलावा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला, कुमारी सैलजा भी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते रहे हैं। वहीं, आप के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता भी इस मुद्दे को लेकर कुरुक्षेत्र के मैदान में डटे हैं।

हरियाणा में बिक रहे ये नशीले पदार्थ
हरियाणा में हेरोइन, स्मैक, चरस, सुलफा, गांजा, अफीम, भुक्की, कोकीन और मोर्फिन समेत अन्य नशे बिक रहे हैं। इनके अलावा अवैध रूप से नशीली दवाएं भी बिकती हैं। नारकोटिक्स ब्यूरो ने साल 2023 में नशा तस्करों से विभिन्न मुकदमा में 34 किलो 108 ग्राम हेरोइन, 7 किलों 543 ग्राम स्मैक, 591 किलों 646 ग्राम चरस, 41 किलो 618 ग्राम सुलफा, 4617 किलो 108 ग्राम गांजा, 313 किलो 501 ग्राम अफीम, 33620 किलोग्राम भुक्की, 150 ग्राम कोकीन, 4 किलो 945 ग्राम हशीश, 235 किलो 051 ग्राम मोर्फिन एवं अन्य नशीले मादक पदार्थ बरामद किए। वहीं, साल 2024 में 1 जनवरी से 31 मार्च तक 6 किलो 402 ग्राम हेरोइन, 29 किलों 060 ग्राम चरस, 2351 किलो 252 ग्राम गांजा, 95 किलो 586 ग्राम अफीम, 294 किलो 760 ग्राम अफीम के पौधे, 2035 किलो 177 ग्राम भुक्खी बरामद की जा चुकी है।

हर माह 350 तस्करों पर कसा जा रहा शिकंजा
एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में हर माह 350 नशा तस्करों पर शिकंजा कसा जा रहा है। इसका मतलब साफ है कि पहले के मुकाबले नशा तस्करी में अधिक लोग जुड़े हैं। उपरोक्त 2024 में से अकेले हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने 97 मुकदमों में 118 नशा तस्करों को काबू किया है। इसी प्रकार 2023 में 3823 मुकदमा दर्ज किए गए, जिसमें 5460 नशा तस्करों को हिरासत में लिया गया।

45 करोड़ की संपत्ति सीज
साल 2024 में अब तक 82 नशा तस्करों की सूची तैयार कर उनके 89 रिश्तेदारों के नाम अवैध रूप से कमाई लगभग 45 करोड़ 56 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति सीज की गई है। 2023 में 15 नशा तस्करों की 44 नजदीकी रिश्तेदारों के नाम गैर-कानूनी तरीके से कमाई लगभग 13 करोड़ रुपये की संपत्ति सीज कराईं गई थी। इससे पहले हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो पीआईटी एनडीपीएस के तहत अभ्यस्त 40 नशा तस्करों को जेल भेजा जा चुका है। वर्ष 2024 में 22 आदतन नशा तस्करों की लिस्ट बनाकर राज्य सरकार को भेजी जा चुकी है।

नशा करने वालों की ओपीडी में हर साल हो रही है बढ़ोतरी
प्रदेश के 11 जिलों सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, रोहतक, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, सोनीपत, पंचकूला और नूंह में नशे के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। नशा करने वालों में युवाओं के साथ महिलाओं की भी तादाद बढ़ी है। नशा करने वालों की ओपीडी साल दर साल बढ़ रही है। 2021 में लगभग 95863 नशा करने वाले लोग ओपीडी में पहुंचे थे। इसमें 28283 महिलाएं थीं। इनमें से 2765 लोगों को भर्ती किया गया। 2022 और 2023 में नशे के जाल में फंसने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार नशे की ओवरडोज की वजह से 2014 से लेकर अब तक 329 मौतें हुई हैं। पिछले डेढ़ साल में अकेले सिरसा जिले में ओवरडोज से 33 मौतें हो चुकी हैं जिनकी उम्र 18 से 30 साल के बीच है।

एनसीबी में पद खाली, कैसे होगी तस्करों पर कार्रवाई
सरकार की ओर से नशे की रोकथाम के लिए एनसीबी (हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) का गठन किया गया है। अलग-अलग जिलों में एनसीबी की टीमें काम कर रही हैं। हालांकि, आज भी एनसीबी में 178 पद खाली हैं। इसलिए जमीनी स्तर पर तस्करों पर नकेल कसने में दिक्कतें आ रही हैं। स्टाफ की कमी तस्करों पर कार्रवाई नहीं होने का बड़ा कारण है।

15 जिलों में हैं नशा मुक्ति केंद्र, वहां पर भी सुविधाएं नहीं
हरियाणा के 15 जिलों में सरकारी नशा मुक्ति केंद्र हैं औप 13 नशा मुक्ति केंद्र निजी संस्थाओं की ओर से चलाए जा रहे हैं। हरियाणा में नशे के मरीज बढ़ रहे हैं, जबकि नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या कम है। वहीं, मौजूदा सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में कहीं पर मनोचिकित्सक नहीं है तो कहीं पर काउंसलर के पद खाली पड़े हैं। केंद्रों में कुछ ही मरीजों को रखने की व्यवस्था है। बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए नए नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने के लिए हरियाणा सरकार 2023 में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज चुकी है।

नशा कम करने और तस्करों पर शिकंजा कसने में सरकार पूरी तरह से फेल रही है। कार्रवाई के नाम पर लोगों को गुमराह करने के लिए आंकड़े रखे जाते हैं, लेकिन सरकार ये नहीं बताती कि सिरसा और हिसार में ओवरडोज से कितने युवकों की मौत हो रही है। इसके अलावा अस्पतालों में नशे के मरीजों की लाइनें लगी हैं। नशा मुक्ति केंद्रों के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। इनेलो का लक्ष्य साफ है कि हरियाणा को नशा मुक्त बनाना है। -अभय चौटाला, विधायक ऐलनाबाद व प्रधान महासचिव इनेलो

अब हरियाणा के युवाओं की नसों में नशा दौड़ रहा है। मुख्यमंत्री के शहर कुरुक्षेत्र और करनाल नशे की गंभीर चपेट में हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार ने पिछले साढ़े नौ साल में नशे पर कितना काम किया है। आज नशे के चलते लगातार हरियाणा के युवाओं की मौत हो रही हैं और गंभीर बात ये है कि बच्चे और महिलाएं भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। कांग्रेस हरियाणा में नशा कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। -रणदीप सुरजेवाला, राष्ट्रीय महासिचव, कांग्रेस

हरियाणा पुलिस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने हरियाणा में नशा तस्करों की कमर तोड़ने का काम किया है। पहली बार नशा तस्करों के साथ उनकी प्रॉपर्टी भी सीज की गई है। इतना ही नहीं नशे की कमाई से खड़े किए गए भवन और प्रतिष्ठानों को भी गिराया गया है। आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि सबसे अधिक कार्रवाई भाजपा सरकार में हुई है। हमारा मकसद नशे के पूरे नेटवर्क को तोड़ना है। नशे को खत्म करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। -अनिल विज, पूर्व गृह मंत्री, हरियाणा

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