चंडीगढ़। बच्चे जहां अपनी नन्ही उम्र में खिलौनों की मांग करते हैं, वहीं रुशील श्रीवास्तव ने 7 साल की उम्र में ही बल्ले की मांग कर सबको चौंका दिया। महज सात साल की उम्र में उन्होंने लेदर बॉल से क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। आज यही जुनून उन्हें ट्राइसिटी के विभिन्न प्रतियोगिता में पहचान दिला रहा है। रुशील दाएं हाथ से शानदार बल्लेबाजी करने के साथ-साथ घातक लेग स्पिन गेंदबाजी में भी माहिर हैं। वे एक बेहतरीन ऑलराउंडर के रूप में लगातार निखर रहे हैं।
पिता का रहा सबसे बड़ा योगदान
उनका कहना है कि इस मुकाम तक पहुंचने में पिता का सबसे बड़ा योगदान रहा। बचपन से ही पिता ने उन्हें और उनके छोटे भाई को क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। चाहे प्रतियोगिता ट्राइसिटी में हो या पंजाब के किसी अन्य हिस्से में, पिता खुद उन्हें वहां लेकर जाते रहे। उसी मेहनत और समर्थन का नतीजा है कि रुशील न सिर्फ स्थानीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं, बल्कि अंडर-23 पंजाब वनडे कैंप में भी अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेर रहे हैं। क्रिकेट जगत में उनका भविष्य उज्ज्वल माना जा रहा है।
विज्ञापन
प्रमुख उपलब्धियां
- अंडर -23 सीके नायडू ट्रॉफी (2024-25) में विजेता टीम का हिस्सा रहे
- अंडर - 23 ईरानी कप (2024-25) में चयन
- पंजाब बनाम रेस्ट ऑफ इंडिया मैच में शामिल
- अंडर -19 राज्य स्तर वीनू मांकड़ ट्रॉफी (2021-22) में हिस्सा लिया
- कूच बिहार ट्रॉफी (2021-22) में शामिल रहे और जिला स्तर पर 315 रन बनाया और 7 विकेट लिया
- बठिंडा में अभी चल रहे अंडर -23 राज्य स्तरीय वनडे कैंप का हिस्सा है