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टैगोर में नाटक चोखेर बाली का मंचन

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चंडीगढ़। कैसे कोई इंसान आपकी जिंदगी में आता है और आपको भनक तक नहीं लगती। लेकिन इंसान जैसा दिखता है वैसा होता नहीं है। धीरे धीरे उसके आचार विचार से या तो वह छा जाता है या आपके आंखों में चुभने लग जाता है। कई बार इंसान की परिस्थितियां ही उसे अच्छा और बुरा करने पर विवश कर देती है। यह दिखाया गया है रवींद्र नाथ टैगोर के लिखे नाटक ‘चोखेर में। मंगलवार को इसका मंचन टैगोर थियेटर में हुआ। दो घंटे के इस नाटक में हास्य, क्रोध और करुण ने दर्शकों को बांधे रखा।
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इस नाटक को सुजीत एस दत्ता ने निर्देशित किया। इस नाटक में विनोदिनी मुख्य भूमिका में है।
नाटक में विनोदिनी की भूमिका निभा रही ऐश्वर्या शर्मा ने कहा कि यह महिला सशक्तीकरण पर केंद्रित है। यह नाटक वर्ष 1903 में लिखी गई है। इस नाटक में दिखाया जाता है कि किस प्रकार से औरत को गलत ठहराया जाता है। वह इतनी सक्षम नहीं होती कि वह अपना अच्छा भला खुद चुन सके। अगर स्त्री आगे बढ़ना चाहती है तो सोसाइटी गलत ठहराती है और उसे गलत नाम देती है। विनोदिनी की जिंदगी में कुछ चुनिंदा लोग आते हैं और वह उनकी जिंदगी पलट देती है। नाटक में दिखाया गया कि विनोदिनी अपने बुआ के साथ महेंद्र बाबू के घर आती है। विनोदनी की सहेली आशा अनपढ़ और नासमझ है। इसके विपरीत विनोदिनी हर काम में कुशल, पढ़ी लिखी और नए विचारों वाली हैं। आशा अपने पति महेंद्र से कहती है कि वह मेरी सहेली विनोदिनी से मिले। लेकिन महेंद्र इसलिए नहीं मिलता है कि विनोदिनी से रिश्ता तय हुआ था, लेकिन महेंद्र ने रिश्ता तोड़ दिया था। लेकिन धीरे धीरे दोनों में दोस्ती बढ़ जाती है। इस रिश्ते को लेकर विनोदिनी और महेंद्र की मां राज लक्ष्मी के बीच लड़ाई होती हैं। कहती है तुम मेरी लड़के की जिंदगी तबाह कर रही हो। समाज के ताना बुना को संजोए इस नाटक में एक कैरेक्टर ठाकुर दा है। ठाकुर दा नासमझ हैं। उन्हें कुछ कहा जाता है और वे समझते कुछ और हैं। इसमें दर्शक अपनी हंसी रोक नहीं पाते। नाटक के कलाकारों में ऐश्वर्या शर्मा, वाणि, किरण नेगी, सचिन, विशाल चौहान, जसपाल सिंह, सोनम गोयल, संजना गांधी, सुजीत एस दत्ता, साबी महाजन ने अपनी अदाकारी को बेहतरीन नमूना पेश किया।
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