माइम थियेटर की एक फॉर्म है। माइम में कलाकार बिना संवाद बोले कहानी बयां करता है। बुधवार दोपहर टैगोर थियेटर के मंच पर कुछ बच्चे इस प्रकार की कोशिश कर रहे थे।
दरअसल यह बच्चें न ही बोल सकते है न ही सुन सकते है। शहर के वाटिका स्पेशल स्कूल के यह 30 बच्चे पिछले 15 दिनों से नाटक ‘स्टोन सूप फॉर द सोल’ की रिहर्सल में व्यस्त हैं।
अमर उजाला से हुई बातचीत में नाटक की निर्देशिका ने साझा किए नाटक और उससे जुड़े चैलेंज। यह नाटक 9 मई को टैगोर थियेटर में शाम 7 बजे पेश किया जाएगा।
स्पेशल बच्चों को निर्देशित करने के लिए सीखी साइन लैंग्वेज
बच्चों के लिए नाटक तैयार कर रहीं सुमेधा ने बताया उन्होंने दो साल पहले अपनी दोस्त के साथ मिलकर दिल्ली में अपनी संस्था पर्पल मैंगो का निर्माण किया था। इसके बाद उन्होंने कालेज और स्कूल के विद्यार्थियों को पर्सनेलिटी डेवलपमेंट के लिए वर्कशॉप लेना शुरू की।
पिछले दो साल से सक्रिय सुमेधा ने बताया कि यह पहला मौका था जब उन्हें इन बच्चों के साथ काम करना था, जो बोल और सुन नहीं सकते। उन्होंने कहा कि स्पेशल बच्चों के साथ बहुत ध्यान से काम करना पड़ता है। उनको समझना और उस हिसाब से उन्हें किरदार देना। सुमेधा ने कहा कि 15 दिनों से इन स्पेशल बच्चों को डायरेक्ट करते-करते वह भी साइन लैंग्वेज सीख गई हैं।
ऐसे बना नाटक
नाटक में 11 से लेकर 15 साल के बच्चे अभिनय करेंगे। नाटक में एक फेड आउट भी रखा गया है, जिसके बारे में बताते हुए सुमेधा कहती है कि नाटक में जरूरत के अनुसार एक फेड आउट जरूरी था। उनके अनुसार कुछ बच्चे पहले स्टेज पर चढ़ चुके हैं, लेकिन कुछ बच्चों के लिए मंच पर चढ़ने का अनुभव पहली बार है।
नाटक की कहानी के बारे में बताते हुए सुमेधा ने बताया कि उन्होंने बच्चों से पहले उनकी पसंद की कहानी पूछी। सभी बच्चों ने डफ एंड डंब का नाम लिया, लेकिन सुमेधा ने सोचा कि क्यों न बच्चों द्वारा ही कोई नई कहानी बनाई जाए। सुमेधा ने बताया कि बेशक यह नाटक बच्चें कर रहे हैं, लेकिन इसे वयस्कों के लिए भी रखा गया है।
उन्होंने बताया कि नाटक में दूसरा सबसे बड़ा चैलेंज था संगीत। नाटक में संगीत की भी बहुत अहमियत है। उन्होंने कहा कि स्टेज में लाइव म्यूजिक का प्रयोग किया गया है। संगीतकार बच्चों की बॉडी लैंग्वेज के हिसाब से ही म्यूजिक ऑपरेट करेंगे।
चंडीगढ़ से पढ़ चुकी हैं दोनों निर्देशिका
सुमेधा ने अपने बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने चंडीगढ़ की पंजाबी युनिवर्सिटी से ही साइकोलॉजी से मास्टर डिग्री ली है। इसके बाद अपनी कंपनी बनाई। निवेदिता ने कहा कि वह भी चंडीगढ़ से 12वीं की पढ़ाई की है।
यू रखा कंपनी का नाम
सुमेधा ने कहा कि उन्होंने अपनी कंपनी का नाम पर्पल मैंगो इसलिए रखा क्योंकि पर्पल वर्ल्ड को सपनों की दुनिया भी कहा जाता है और उन्हें आम बहुत पसंद है इसलिए इन्होंने अपनी कंपनी का नाम पर्पल मैंगो रखा।