कीमत तय होने के बाद गवर्नमेंट मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल (जीएमसीएच) 32 में दिल में लगने वाले स्टेंट के दाम गिर गए हैं। जिस स्टेंट की कीमत पहले 40 हजार रुपये थी, अब उसकी कीमत 30 हजार कर दी गई है।
जीएमसीएच 32 में एक और स्टेंट का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी कीमत 25 हजार रुपये है। उसके रेट में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। दोनों ही ड्रग एल्यूटेड स्टेंट हैं। हालांकि पीजीआई में किसी भी कंपनी के स्टेंट का अधिकतम मूल्य 23625 रुपये है। विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों स्टेंट में फिलहाल ज्यादा अंतर नहीं है। 30 हजार वाले स्टेंट तकनीकी थोड़ा ज्यादा अच्छा है। काम दोनों का एक ही है। पीजीआई में स्टेंट अमृत फार्मेसी के जरिए बेचे जाते हैं, जबकि जीएमसीएच 32 में कंपनी के नुमाइंदे सीधे पेशेंट को बेचते हैं।
दोनों जगह ड्रग एल्यूटेड स्टेंट का इस्तेमाल
पीजीआई और जीएमसीएच 32 में ड्रग एल्यूटेड स्टेंट का इस्तेमाल किया जाता है। यह स्टेंट धीरे-धीरे दवा भी छोड़ता है, जो दोबारा से ब्लाकेज को रोकता है। इसकी कीमत 30 हजार रुपये है। दूसरा स्टेंट मेटल का है। इसकी कीमत 7500 रुपये है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्टेंट का सबसे पुराना माडल है। फिलहाल इसका इस्तेमाल बहुत कम होता है। एक तीसरा स्टेंट बायोरीज्योरेबिल होता है। यह आर्टरीज में लगने के बाद धीरे-धीरे घुल जाता है। इससे शरीर में मेटल नहीं रहता। यह लेटेस्ट तकनीक से बना स्टेंट है। इसकी कीमत भी 30 हजार रुपये तय की गई है। इसका भी इस्तेमाल शहर में नहीं किया जाता।
कंपनी अपना सकती है ये हथकंडा
जीएमसीएच 32
- फोटो : File Photo
स्टेंट के अलावा भी अतिरिक्त खर्च
स्टेंट की कीमत कम होने का मतलब यह नहीं है कि स्टेंट अब 23 हजार का पड़ेगा या फिर 30 हजार का। स्टेंट के अलावा कई और चीजे भी हैं, जिनका इस्तेमाल स्टेंट डालने के दौरान किया जाता है। पीजीआई की अमृत फार्मेसी द्वारा बैलून (नौ हजार), गाइडिंग कैथेटर (तीन हजार), गाइडिंग वायर (4400 रुपये), पीटीसीए किट (800), पंप (2500 रुपये) सर्जरी के दौरान इस्तेमाल के लिए दिया जाता है। ये रेट अमृत फार्मेसी के हैं। इसलिए जाहिर है कि ये सामान जीएमसीएच 32 में थोड़ा महंगा मिलता होगा। इसके अलावा दवाइयों का खर्च अलग से है।
कंपनी अपना सकती है ये हथकंडा
बीजेपी फार्मासेल के प्रेसिडेंट प्रिंस भुंढेला ने बताया कि स्टेंट कंपनियां अपने प्राफिट को पूरा करने के लिए दूसरे हथकंडे अपना सकती हैं। स्टेंट के अलावा दूसरे सामानों के रेट बढ़ाए जा सकते हैं। ऐसे में पीजीआई व जीएमसीएच 32 के प्रशासन को पूरे प्रक्रिया में नजर रखनी चाहिए, ताकि कंपनियां इसका फायदा न उठा पाएं।