चंडीगढ़। लगातार दर्द के कारण अगर चलना-फिरना, काम करना या नींद प्रभावित हो रही है तो इसे जिंदगी का हिस्सा मानकर सहते रहने की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक क्रोनिक पेन के सही कारण की पहचान और मरीज की जरूरत के अनुसार उपचार से दर्द नियंत्रित करने के साथ सामान्य जिंदगी लौटाई जा सकती है। पीजीआई में चल रहे इनप्रोन्यूरोमॉड 2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शनिवार को देश-विदेश के विशेषज्ञों ने आधुनिक पेन मैनेजमेंट पर चर्चा की।
एनेस्थीसिया एंड इंटेंसिव केयर विभाग की प्रमुख डॉ. काजल जैन ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य क्रोनिक पेन और न्यूनतम इनवेसिव उपचार के बारे में जानकारी बढ़ाना है। सम्मेलन में करीब 80 विशेषज्ञ शामिल हुए हैं। यहां एडवांस इंटरवेंशन और न्यूरोमॉड्यूलेशन की हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण अधिक डॉक्टरों तक पहुंचने से मरीजों को अपने शहर में ही बेहतर उपचार मिल सकेगा।
पेन मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. प्रीति डोशी ने कहा कि रीढ़ की सर्जरी के बाद लगातार दर्द रहने वाले हर मरीज को दोबारा ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती। सही जांच और मरीज के चयन के बाद इंटरवेंशनल उपचार दर्द नियंत्रित करने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है।
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उपचार का लक्ष्य सिर्फ दर्द का स्कोर कम करना नहीं
सिंगापुर के डॉ. यानझी जांग ने कहा कि दर्द हर व्यक्ति में अलग अनुभव होता है और व्यक्तिगत परिस्थितियां भी इसे प्रभावित करती हैं। इसलिए उपचार मरीज की जरूरत के अनुसार तय होना चाहिए। डॉ. नितिका गोयल ने कहा कि दर्द को अलग क्लिनिकल समस्या के रूप में पहचानकर समय पर विशेषज्ञ के पास रेफर करना जरूरी है। उपचार का लक्ष्य मरीज को फिर से चलने, काम करने और आत्मनिर्भर जीवन जीने में सक्षम बनाना होना चाहिए।