चंडीगढ़। नसबंदी के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई है। इस कारण शुक्रवार को दो कुत्तों की मौत हो गई। जबकि एक की हालत नाजुक है। मामला पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी तक पहुंच गया है। उन्होंने फोन पर इसकी जानकारी पशुप्रेमी सिमरन से ली है।
सेक्टर 38 में रहने वाली सिमरन ने बताया कि वह शहर में कुत्तों की देखरेख का काम करती हैं। जहां कहीं भी उन्हें घायल अवस्था में कोई कुत्ता मिलता है, वह उसे अस्पताल पहुंचाने के साथ इलाज भी करवाती हैं। सिमरन का कहना है कि करीब 10 दिन पहले उन्होंने नसबंदी कराने के लिए तीन कुत्तों को सेक्टर 38 वेस्ट में स्थित निगम के अस्पताल को दिया था। वह कई बार इन कुत्तों की जानकारी लेने अस्पताल गई। लेकिन किसी ने कुछ भी नहीं बताया। बकौल सिमरन, शुक्रवार को सेक्टर 38 में ही तीन कुत्ते खून से लथपथ दिखे। यह वही कुत्ते थे, जिन्हें सिमरन ने अस्पताल में भर्ती कराया था।
नसबंदी के बाद बेजुबानों की आंतें बाहर लटक रही थीं
सिमरन ने बताया कि तीनों कुत्तों की नसबंदी में इतनी लापरवाही बरती गई कि उनका इलाज करने के बजाय उन्हें अस्पताल से भगा दिया। इसके चलते उनके पेट से आंतें बाहर निकल आई थीं। उनका कहना है कि यदि ठीक प्रकार से डॉक्टरों ने इलाज कर दिया होता तो इनकी मौत नहीं होती। पूरे मामले से प्रशासन के साथ ही निगम को अवगत कराया जाएगा।
मेनका गंाधी ने लिया संज्ञान
सिमरन ने बताया कि मेरे एक परिचित ने फेसबुक पर कुत्तों के साथ हुई इस लापरवाही पर पोस्ट डाल दी, जिसमें मेरा नंबर भी था। वहां से नंबर लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी फोन पर मुझसे संपर्क किया। उन्होंने पूछा कि वहां कुत्तों की नसबंदी किस प्रकार की जा रही है। साथ ही उन्होंने पूरी रिपोर्ट भी प्रशासन से मांगने की बात कही।
डॉ. कंब्रोज से नहीं हो पाया संपर्क
इस संदर्भ में एमओएच डॉ. एपी सिंह ने बताया कि कुत्तों से संबंधित मामलों को डॉ. एमएस कंबोज देखते हैं। लेकिन मैं अपने स्तर से पूरे मामले की जानकारी करता हूं। जब इस मामले को लेकर डॉ. कंबोज से संपर्क साधा गया तो उनका फोन लगातार बंद जा रहा था। उनका पक्ष जब आएगा तो प्रकाशित किया जाएगा।