पंजाब सरकार द्वारा नान प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) को बेसिक वेतन से हटाने और एनपीए को 25 फीसदी से कम कर 20 फीसदी करने पर शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के सभी डॉक्टर एक दिन की हड़ताल पर रहे। हड़ताल के कारण सुबह से ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप रहीं। कोई भी डॉक्टर अपनी सीट पर नहीं बैठा।
डॉक्टरों की हड़ताल का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा। जिन लोगों को हड़ताल की जानकारी नहीं थी, वह सुबह ही अस्पताल पहुंच गए थे। आखिरकार उन्हें बिना इलाज लौटना पड़ा। हालांकि इस हड़ताल के दौरान इमरजेंसी सेवाएं बहाल रखी गई थी। इस दौरान पीसीएमएस एसोसिएशन ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान लुधियाना के सिविल अस्पताल स्थित जच्चा और बच्चा अस्पताल में ओपीडी सेवाओं को बंद रखा गया।
जांच करवाने पहुंचीं गर्भवती महिलाओं की ओपीडी स्लिप तक नहीं बना कर दी गई। उन्हें बिना जांच घरों को लौटना पड़ा। न्यू माधोपुरी की रहने वाली सीमा कहा कहना है कि वह छह माह की गर्भवती हैं। हड़ताल की जानकारी नहीं थी। अब फिर शनिवार को दोबारा आना पड़ेगा। इसी तरह गांव जस्सियां, हैबोवाल कलां के ब्रहमदेव का एक हादसे में पैर टूट गया था। शुक्रवार को डॉक्टर ने चेकअप के लिए बुलाया था, इसलिए वह बड़ी मुश्किल से सिविल अस्पताल पहुंचे लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल पर होने के कारण बिना जांच घर लौट आए।
पठानकोट के सिविल अस्पताल समेत छह सीएचसी व सभी पीएचसी में लोगों को इलाज नहीं मिला। वहीं जालंधर में पीसीएमएस डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर ओपीडी ठप कर रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान सिविल सर्जन ऑफिस में डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की व सिविल सर्जन डॉ. बलवंत सिंह को मांग पत्र भी सौंपा।
अमृतसर में एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सतनाम सिंह ने बताया कि डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की शुक्रवार की हड़ताल सरकार को चेतावनी के तौर पर सांकेतिक थी। उनका कहना है कि मांगों के वक्त सरकार का खजाना खाली हो जाता है जबकि सच्चाई तो यह है कि विधायकों, मंत्रियों और सांसदों के वेतन और पेंशन से खजाना खाली होता है। इस अवसर पर डॉ. चंद्रमोहन और राजेश शर्मा सहित अन्य डाक्टर और मौजूद रहे।