पीजीआई के आधे डॉक्टर सोमवार से 15 दिन के लिए विंटर वेकेशन पर चले गए। डॉक्टरों की छुट्टी के साथ ही मरीजों की परेशानी भी शुरू हो गई है। सोमवार को ऑर्थोपेडिक की ओपीडी में यह परेशानी साफ नजर आई। इस दिन 400 से ज्यादा मरीज थे और सीनियर डॉक्टर सिर्फ एक, बाकी रेजीडेंट।
पीजीआई की ओर से अतिरिक्त डॉक्टरों की व्यवस्था नहीं होने से मरीज काफी परेशान हुए। मरीजों को यह परेशानी एक महीने तक भोगनी होगी। कारण, आधे डॉक्टर 15 दिन की छुट्टी पर गए हैं और बाकी आधे डॉक्टर 15 दिन बाद छुट्टी पर जाएंगे।
दोपहर बाद आया नंबर
जम्मू से आए अब्दुल रहमान ने बताया कि वे रविवार शाम ही पीजीआई पहुंच गए थे। उनकी पैर की हड्डियों में काफी दर्द है। सुबह जल्दी उठकर पहले कार्ड के लिए लाइन में लगे।
पहले वे एडिशनल प्रोफेसर आदित्य अग्रवाल के ओपीडी रूम के सामने खड़े थे। डेढ़ घंटा बीतने के बाद उनका कार्ड दूसरे रूम में पहुंचा दिया गया। कहा गया कि यहां डॉक्टर देखेंगे। आधा घंटा बीतने के बाद डॉक्टर आए और मरीज देखने शुरू किए। अब्दुल रहमान का नंबर सवा दो बजे आया।
प्रोफेसर के बजाय रेजीडेंट डॉक्टर ने देखा
कई मरीजों को पीजीआई के डॉक्टरों की वेकेशंस के बारे में पता नहीं था। वे सोचकर आए थे कि ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों को दिखाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पंचकूला से आईं वनीता ने बताया कि पहले उनका नंबर सीनियर डॉक्टर के कमरे में लगा हुआ था, लेकिन जब बारी आई तो उनका कार्ड रेजीडेंट के कमरे में रख दिया गया। बाद में उन्हें रेजीडेंट ने देखा।
आम दिनों में भी ऐसे रहते हैं हालात
ऑर्थोपेडिक की ओपीडी में आमतौर पर भी हालात ज्यादा अच्छे नहीं होते। सीनियर डॉक्टर अक्सर 10:30 या 11 बजे तक आते हैं। कई बार 12 भीबज जाते हैं। हालांकि डॉक्टरों की दलील है कि वे ओपीडी में आने से पहले वार्ड में दाखिल मरीज देखने जाते हैं, लेकिन दूसरे विभाग के कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं, जो बिना देरी किए समय पर पहुंचते हैं।
जो डॉक्टर अस्पताल छोड़ चुके, उनका नाम बोर्ड पर
ऑर्थोपेडिक ओपीडी के बाहर लगे सूचना बोर्ड में भी गुमराह करने वाली सूचना लिखी है। बोर्ड के मुताबिक, सोमवार को तीन डॉक्टरों की ओपीडी होती है। इसमें पहला नाम रमेश सेन, दूसरा नाम आदित्य अग्रवाल व तीसरा नाम आरके कनोजिया का है। रमेश सेन एक साल पहले ही पीजीआई छोड़कर फोर्टिस हॉस्पिटल ज्वाइन कर चुके हैं।