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चमत्कार! मरीजों को फिर से जिंदा कर देंगे डॉक्टर

Mon, 09 Dec 2013 02:56 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
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जीएमसीएच-32 में दिल की बंद धड़कन को फिर से शुरू करने की ट्रेनिंग देने के कोर्स की शुरुआत हो चुकी है।
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यह कोर्स मात्र ढाई दिन का है। इसमें बेसिक और एडवांस्ड कार्डिक लाइफ सपोर्ट की पूरी जानकारी दी जाएगी। बेसिक तकनीक की ट्रेनिंग आम आदमी भी ले सकता है।

एडवांस ट्रेनिंग सिर्फ डाक्टर और नर्स ही ले सकती हैं। इस कोर्स को चलाने के लिए अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की ओर से जीएमसीएच-32 को मान्यता मिल चुकी है।

पहले बैच की पढ़ाई रविवार को खत्म होगी। कोर्स की शुरुआत शुक्रवार को हुई थी। कोर्स का उद्घाटन जीएमसीएच 32 के डायरेक्टर प्रिंसिपल प्रो. अतुल सचदेवा ने इसका शुभारंभ किया।

हेड ऑफ डिपार्टमेंट एनेस्थीसिया और इन्सेंटिव केयर की प्रो. सतिंदर गोम्बार ने बताया कि एडवांस्ड ट्रेनिंग में उन सभी तकनीक के बारे में बताया जाएगा, जिनसे बंद धड़कन को फिर से चालू किया जाता है।
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इन तकनीकियों को सीखने के बाद कई मरीजों की जान बचाई जा सकेगी। इस कोर्स का मकसद डाक्टरों को ट्रेंड करना है। पहले बैच में पीजीआई, जीएमसीएच-32 व अन्य अस्पतालों के 30 डॉक्टरों ने हिस्सा लिया।

दिल्ली और लुधियाना से आई टीम
डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने के लिए दिल्ली और लुधियाना से डाक्टरों की टीम पहुंची हुई थी। दिल्ली से डॉ. राकेश कुमार और लुधियाना से डॉ. अंजू अग्रवाल अपनी टीम के साथ आईं थी।
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उन्होंने डाक्टरों को बंद धड़कनों में खून की दौड़ाना शुरू करने, उसे एक्टिव करने आदि एडवांस मशीनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

आम आदमी और डॉक्टरों को होगा फायदा
प्रो. सतिंदर गोम्बार ने बताया कि एजुकेशन की रोड एक्सीडेंट में मृत्यु दर कम करने में मदद मिलेगी। कई बार ऑपरेशन थियेटर में घायल की धड़क रुक जाती हैं। डाक्टरों को भी इस की जानकारी नहीं होती। वे चाहते हुए भी मरीज को नहीं बचा सकते।

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