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अलर्टः नैक के सुझावों को दरकिनार न करे पंजाब यूनिवर्सिटी, 2022 में भुगतना पड़ सकता अंजाम

Fri, 03 Jul 2020 12:19 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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पंजाब विश्वविद्यालय दस साल में नैक के एक सुझाव पर काम नहीं कर पाया। विभागों को मर्ज करने की बारी थी। बैठकें तो हुईं, लेकिन जो काम करना था, वह नहीं किया गया। आज हाल वही है। जानकारों का कहना है कि साल 2022 में नैक की टीम पीयू का दौरा करेगी और हाल वही पुराना मिलेगा तो पीयू को अंजाम भुगतना होगा। बी ग्रेड मिला तो तमाम फंड पर रोक लगेगी। विभागों को सुविधाओं आदि के लिए बजट का अभाव होगा।
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सूत्रों का कहना है कि नैक ने वर्ष 2009-10 में पीयू का दौरा किया। उस दौरान टीम को पीयू में छोटे-छोटे विभाग चलते मिले। टीम का तर्क था कि जहां फैकल्टी एक, दो या तीन हो तो उन विभागों को मर्ज कर दिया जाए। कम से कम एक विभाग में छह फैकल्टी होनी चाहिए। इसके चलते विभागों की मजबूती के लिए सरकारी प्रोजेक्ट भी मिलते हैं और सहायता के लिए रकम भी मिलती है।

इस सुझाव पर पीयू को काम करने के लिए नैक ने कहा। वर्ष 2015 में फिर नैक का दौरा हुआ। स्थिति टीम ने पुरानी पाई। इस प्रस्ताव पर काम नहीं हुआ। टीम ने नाराजगी जाहिर की। पीयू उस दौरान बमुश्किल बचा अन्यथा ग्रेड बी में आने से कोई नहीं रोक सकता था, लेकिन ग्रेड ए मिला, लेकिन अंक कम मिले।
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अब वर्ष 2022 में नैक की टीम का तीसरा दौरा होगा। टीम के सदस्य पुराने सुझावों पर अमल के बिंदुओं को देखेंगे तो उनके सामने फिर वही संकट खड़ा होगा। छोटे विभागों को मर्ज नहीं किया गया। जानकारों का कहना है कि इस बार नैक की टीम माफ करने वाली नहीं है।

यदि पीयू ने इस पर काम नहीं किया तो पीयू को ग्रेड बी में भी आना पड़ सकता है। इससे फिर सरकारी बजट आदि का टोटा होगा। ग्रेडिंग के आधार पर सरकार से बजट भी मिलता है। हालांकि, पीयू प्रशासन का कहना है कि वह इस प्रस्ताव पर काम कर रहा है। बैठकें आदि भी हो रही हैं।

यह आ रही है बाधा
छोटे-छोटे विभाग मर्ज होना नहीं चाहते। क्योंकि वहां बारी-बारी से चेयरमैन बनाए जाते हैं, जिसकी बारी अब आई है, वह नहीं चाहते कि उनका कार्यकाल पूरा न हो। पीयू में कई विभाग ऐसे हैं, जहां फैकल्टी एक से दो लोगों की है। यह विभाग नियमों के मुताबिक मर्ज हो जाने चाहिए, लेकिन छोटे विभागों के अध्यक्ष सब एक हो जाते हैं। यह प्रकरण राजनीति का केंद्र भी बन गया है। इस पर कोई ठोस प्लान नहीं बनाया गया।
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