हरियाणा में मीठे पानी वाले लखपति तो खारा पानी वाले इनसे कहीं बढ़कर करोड़पति बन सकते हैं। आपको विश्वास नहीं हो रहा तो बता देते हैं कि हरियाणा सरकार के मत्स्य विभाग ने मछली पालन के क्षेत्र में जो प्रयोग किया है वही बेहतरीन सफलता के मुकाम पर पहुंचा है।
इसका मॉडल दिखाते हुए चंडीगढ़ के एग्रोटेक में पंचकुला के सहायक मत्स्य अधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि हरियाणा के मत्स्य विभाग ने रोहतक जिला में स्थित मत्स्य केंद्र में खारा पानी में झींगा मछली पालन का सफल प्रयोग किया है।
यह प्रयोग रोहतक, झज्जर एवं प्रदेश में खारा पानी के क्षेत्र के युवाओं को बेहतर कमाई का साधन हो सकता है। उन्होंने बताया कि यह मछली किसान करीब 700 रुपये प्रति किलो के भाव से बेच सकता है और एक हैक्टेयर में 10 हजार किलो से लेकर 20 हजार किलो तक तैयार हो सकती है। झींगा मछली 120 दिन में बेचने लायक तैयार हो जाती है।
मीठे पानी में भी मत्स्य से बन सकते है लखपति
मनीष कुमार के अनुसार मीठे पानी में तैयार होने वाली कतला, सिल्वर कॉर्प, राहू, ग्रास कॉर्प,मिरगल और कॉमन कॉर्प किस्म की मछली 8-9 माह में तैयार होती है और इसमें भी मत्स्य पालक एक हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 7-8 लाख रुपये कमा रहे हैं। पारंपरिक खेती में ज्यादा फायदा न होने से वर्तमान में पढ़े-लिखे युवाओं का मत्स्य पालन की और पिछले कई वर्षों से रुझान बढ़ता जा रहा है।
हड्डियां होती है मजबूत
झींगा मछली के नियमित सेवन से हड्डियां मजबूत बनती हैं वहीं दिमाग भी तेज होता है। वजन नियंत्रित रहता है और दिल की बीमारी पर रोक लगती है। इस मछली को खाने वाले के चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पड़ती और बड़ी उम्र तक जवान दिखने में लाभदायक है।
20 से 50 प्रतिशत की मिलती है छूट
मनीष ने आगे बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा मीठे पानी में पलने वाली मछलियों का व्यवसाय करने वाले सामान्य वर्ग लोगों को 20 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है।