देर रात तक फूटे पटाखे
यूटी प्रशासन ने दिवाली पर प्रदूषण पर काबू पाने के लिए सख्त कदम उठाए थे। शहर में लोगों को सिर्फ ग्रीन पटाखे ही जलाने की अनुमति थी। रात 8 बजे से रात 10 बजे के बीच की अनुमति दी गई थी, लेकिन देर रात तक आतिशबाजी होती रही।
एक्यूआई बिगड़ा
एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) में खराब श्रेणी की हवा से स्वास्थ्य पर कई दुष्प्रभाव होते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय के मरीजों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है। आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में सुबह-शाम खुली हवा में व्यायाम से बचें, मास्क पहनें और घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
ग्रीन पटाखों की ही थी अनुमति
पारंपरिक पटाखों से निकला धुआं और हानिकारक कण त्योहार के बाद वायु प्रदूषण को बढ़ा देते हैं इसलिए ही ग्रीन पटाखों को अनुमति दी गई है। दिवाली पर रात 8 बजे से लेकर 10 बजे तक और गुरु पर्व के मौके पर सुबह 4 बजे से लेकर 5 बजे और फिर रात में 9 बजे से लेकर 10 बजे के बीच ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति है। ग्रीन पटाखे हवा में कम जहरीले कण छोड़ते हैं, जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा कम होता है। ग्रीन पटाखों पर 'ग्रीन' और 'ई' मार्किंग होती है, जिससे इन्हें पहचाना जा सकता है।
पुलिस ने भी मनाया पर्व, सिपाही स्वाति ने थाने में बनाई रंगोली
दिवाली पर पुलिस भी पूरी मुस्तैद नजर आई। हालांकि पुलिसकर्मियों ने भी त्योहार के उल्लास में अपना योगदान दिया। सेक्टर 34 थाने में तैनात सिपाही स्वाति ने ड्यूटी के साथ ही दिवाली पर रंगोली बनाई। सेक्टर 34 थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सतविंदर ने बताया कि हम अपनी ड्यूटी सजगता से कर रहे हैं लेकिन दिवाली भी मनानी है।