आखिर आशुतोष महाराज का संस्कार कैसे किया जाए? ये सवाल दिव्य ज्योति जागृति संस्थान से पूछा गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संस्थान को एक प्रस्ताव तैयार करके जवाब देने को कहा है।
गौरतलब है कि पंजाब के जालंधर में नूरमहल स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान प्रमुख जनवरी माह से समाधि में लीन है। उन्हें क्लीनिकली डेड करार दिया गया है, लेकिन संस्थान यह मानने को तैयार नहीं है।
मामले में जस्टिस एसके मित्तल व जस्टिस एमएस चौहान की डिवीजन बेंच ने सवाल उठाया है कि क्लीनिकल डेड व्यक्ति को समाधिलीन बताकर जीवित कैसे माना जा सकता है।
यह तर्क देते हुए बेंच ने कहा है कि संस्थान प्रस्ताव बनाए कि आखिर आशुतोष महाराज का अंतिम संस्कार किस विधि से किया जाए।
बेंच ने कहा है कि संस्थान को इस बात की मिसाल पेश करनी चाहिए कि धार्मिक मसले आपस में सुलझाए जा सकते हैं। बेंच के सवालों पर संस्थान कोई संतुष्ट जवाब नहीं दे सका।