जिला अदालत में दस नए जजों की नियुक्ति तो मिल गई, लेकिन कोर्ट में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में कटौती हो गई। कर्मचारी कम होने के कारण काम का बोझ ज्यादा होगा।
इससे अदालत के कर्मचारी काफी निराश है। कर्मचारियों ने बताया कि जजों की संख्या के साथ ही स्टाफ सदस्यों की संख्या भी बढ़ानी चाहिए।
अदालत में स्टेनोग्राफर ग्रेड-1 के चार पद स्वीकृति के लिए भेजे गए थे। मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस ने इन पदों की स्वीकृति नहीं दी है।
स्टेनोग्राफर ग्रेड-1 पद पर काम करने वाला कर्मचारी अदालत में जजमेंट राइटर का भी काम देखता है। इसी पद की सेंक्शन नहीं आई है। इसके अलावा अहलमद के आठ पदों की मांग की गई थी।
मिनिस्ट्री ने मात्र चार ही पद स्वीकृत किए हैं। इस समय डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में 20 कोर्ट हैं, जबकि स्टेनोग्राफर 35 हैं। पांच स्टेनोग्राफर अभी भी कम हैं। इसके अलावा पांच पद लीव रिजर्व के भी अभी तक नहीं भरे गए हैं।
अब 10 कोर्ट और आ रहे हैं। इनको देखते हुए सेंक्शन पोस्ट काफी कम हैं। इस बारे में ज्वाइंट सेक्रेटरी होम एमएम सभ्रवाल का कहना है कि उनके पास 88 पदों की रिक्वायरमेंट आई थी।
सरकार से जजों को मिलाकर कुल 68 पदों की ही सेंक्शन आई है। जिला अदालत प्रबंधन पदों को बढ़ाने को लेकर कोई प्रस्ताव भेजता है तो वे जरूर देखेंगे।