जिला बाल भलाई कमेटी के प्रयास से नाबालिग परिजनों से मिली
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नौकरी का झांसा देकर कुछ शरारती तत्व पश्चिम बंगाल से 16 साल की लड़की को ले आए थे। उसे जिला बाल भलाई कमेटी और जिला बाल सुरक्षा यूनिट की तरफ से परिजनों को सौंपा गया है।
बाल भलाई कमेटी के चेयरमैन गुलशन राय ने बताया कि बचपन बचाओ आंदोलन और पुलिस की मदद से शंकर रविदास की बेटी को बचाया गया है। लड़की कई महीने से किसी के घर में बिना वेतन काम कर रही थी। उन्होंने बताया कि जिला बाल सुरक्षा यूनिट की तरफ से बाल भलाई कमेटी के आदेश पर लड़की को चिल्ड्रेन होम में रखा गया। काउंसलिंग के दौरान बताया कि वह जिला अलीपुर पश्चिम बंगाल के शहर तुलसीपारा की रहने वाली है।
गुलशन राय ने बताया कि परिजनों की तलाश करके जुवेनाइल जस्टिस केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन के तहत लड़की को उसके परिजनों को सौंपा गया। उन्होंने बताया कि इस मौके पर बाल भलाई कमेटी के मेंबर सुनीत सिंह भी मौजूद थे।
जिक्रयोग है कि बच्चों से मजदूरी करवाना अपराध है। ऐसा करने वालों को नियम के तहत सजा और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। वहीं, प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि यदि वह कहीं बाल मजदूरी होते देखते हैं तो उस बारे में तुरंत प्रशासन को सूचित करें। शहर में यह पहला मामलमा है, जब बाल भलाई कमेटी की तरफ से परिजनों को लड़की सौंपी गई है। इससे पहले पुलिस की तरफ से ऐसा प्रोग्राम चलाया गया था। जिसमें कई नाबालिग बच्चों को परिजनों से मिलाया गया था।