रिलीज होने से पहले ही विवादों में घिरी पंजाबी फिल्म ‘कौम दे हीरे’ के संबंध में गंभीरता दिखाते मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह ने कहा है कि प्रदेश के गृह सचिव इस विवाद को देखेंगे। जो भी उचित होगा, वह किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सोमवार को अमृतसर में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि हालांकि केंद्रीय सेंसर बोर्ड हर फिल्म को मंजूरी देता है और किसी भी आपत्तिजनक सीन को हटा दिया जाता है, लेकिन फिर भी वह अपने गृह सचिव से कहेंगे कि वे इस मामले पर पूरी निगाह रखें।
यह भी कहा कि यदि इस फिल्म में ऐसा कुछ है, जो कि किसी वर्ग विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है तो सेंसर बोर्ड को इस पर ध्यान देना चाहिए।
कांग्रेस की ओर से ‘कौम दे हीरे’ का विरोध किए जाने संबंधी सवाल के जवाब में बादल ने कहा कि वह सब ठीक है, लेकिन उन्होंने फिल्म नहीं देखी है। इस संबंध में जो भी सरकार को करना होगा, किया जाएगा, पर फिल्म से संबंधित निर्णय सेंसर बोर्ड को ही लेना है।
‘साडा हक्क’ और ‘आरक्षण’ पर हो चुका है विवाद
इससे पहले आतंकवाद के मुद्दे पर बनी फिल्म ‘साडा हक्क’ और रिजर्वेशन पर आधारित फिल्म ‘आरक्षण’ के संबंध में भी पंजाब में विवाद हो चुका है। ‘साडा हक्क’ को पंजाब सरकार ने बैन कर दिया था, ‘आरक्षण’ को पंजाब सरकार के एक पैनल द्वारा क्लीयर किए जाने के बाद ही इसे प्रदेश में रिलीज करने की इजाजत दी गई थी।