पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के दौरान वीरवार को जो कुछ हुआ, उसने इसी सदन में 31 साल पहले हुई एक घटना की याद ताजा कर दी। विधानसभा सत्र का वह महीना भी जून ही था।
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वीरवार को आम आदमी पार्टी के विधायक की मार्शलों के साथ धक्कामुक्की में पगड़ी उतरने का जितना तीखा विरोध अकाली दल बादल ने किया, उसी तरह 1986 में प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली दल ने ही इस सदन में कुछ ऐसा किया था, जिससे तत्कालीन स्पीकर सुरजीत सिंह मिन्हास की पगड़ी गिर गई थी।
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पांच बार सूबे के मुख्यमंत्री रह चुके प्रकाश सिंह बादल ने वीरवार को घायल आप विधायकों से मिलने के बाद विधानसभा के घटनाक्रम को लोकतंत्र के लिए भयावह और शर्मनाक करार दिया है, लेकिन 31 साल पहले जून, 1986 को प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में शिअद विधायकों के एक दल ने स्पीकर सुरजीत सिंह मिन्हास को उनकी सीट से ही घसीट लिया था और इस दौरान हुई हाथापाई में मिन्हास की पगड़ी नीचे गिर गई थी।
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हालांकि, उस समय मिन्हास भी शिअद के ही सदस्य थे। सदन में यह घटना उन हालात में हुई थी, जब बादल के नेतृत्व में अकाली दल का एक धड़ा तत्कालीन मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला के अकाली दल से अलग हो गया था।
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अकाली दल के दो धड़ों में बंट जाने के बाद सदन में बादल गुट के सदस्य बरनाला और उनके साथियों की सुरक्षा कर रहे सुरक्षा स्टाफ को धकेलकर स्पीकर की सीट तक पहुंच गए थे।
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यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना, जिसमें कहा गया था कि विधायकों ने स्पीकर की पगड़ी का अपमान किया। दरअसल, बादल और बरनाला के बीच मतभेद अप्रैल, 1986 में दरबार साहिब परिसर में पुलिस बल भेजे जाने को लेकर उपजे थे। बादल 23 विधायकों के साथ बरनाला से अलग हो गए, जिससे मई 1987 में पंजाब विधानसभा भंग कर दी गई।
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गौरतलब है कि सुरजीत सिंह मिन्हास जून, 1986 में उस समय पंजाब विधानसभा के स्पीकर बने जब तत्कालीन स्पीकर रवि इंदर सिंह ने सुरजीत सिंह बरनाला से मतभेद के चलते पद छोड़ दिया।