सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार रोकने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। हरियाणा की खट्टर सरकार ने केंद्र की मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के नक्शे कदम पर चलते हुए ग्रुप सी और डी की भर्तियों में इंटरव्यू को खत्म कर दिया है। अब हरियाणा में आने वाले समय में दोनों श्रेणियों की सरकारी भर्ती में नौकरी मेरिट के आधार पर मिलेगी, न कि सिफारिश पर। इंटरव्यू को खत्म करने का निर्णय यहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।
सरकार ने लिखित परीक्षा के जरिए ही तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के सभी पद भरने का फैसला किया है। लिखित परीक्षा का प्रारूप मुख्यमंत्री के साथ सभी मंत्री मिलकर तय करेंगे। परीक्षा हरियाणा लोक सेवा आयोग लेगा या कर्मचारी चयन आयोग, यह निर्णय भी मंत्री समूह अलग से बैठक कर लेगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ चर्चा में मंत्रियों ने इसके लिए अन्य राज्यों गुजरात और उत्तर प्रदेश की सी व डी श्रेणी की भर्ती नीति का भी अध्ययन करने का सुझाव दिया, जिसे एक सुर में मान लिया गया।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण बेदी ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकारी सेवाओं की भर्तियों में होने वाली धांधली को मद्देनजर रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
खत्म होगी धांधली
सरकारी नौकरियों में इंटरव्यू सिस्टम खत्म
इंटरव्यू में लगाई जाने वाली सिफारिश का झंझट खत्म हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद बी, सी और डी श्रेणी की भर्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए इंटरव्यू खत्म करने का एलान किया था। जिस पर अमल करते हुए हरियाणा सरकार ने भी मुहर लगा दी है। ग्रुप सी में लिपिक वर्ग, लाइनमैैन, फोरमैन, जेई-1 व उप अधीक्षक स्तर तक और ग्रुप डी में चपरासी, चौकीदार, माली व ड्राइवर आते हैं।
12 प्रतिशत अंक थे इंटरव्यू के
खट्टर सरकार ने सत्ता संभालने के बाद हुड्डा सरकार के इंटरव्यू पैटर्न को बदल दिया था। हुड्डा सरकार के समय 75 प्रतिशत अंक लिखित परीक्षा और 25 प्रतिशत इंटरव्यू के होते थे। भाजपा सरकार ने बदलाव कर लिखित परीक्षा के अंक 88 फीसदी और इंटरव्यू के 12 फीसदी कर दिए थे। अब इंटरव्यू खत्म होने से अभ्यर्थियों में लिखित परीक्षा में आगे निकलने की होड़ मचेगी।
दोनों श्रेणी के लाखों पद खाली
हरियाणा में सबसे अधिक कर्मचारी ग्रुप सी और डी श्रेणी में ही हैं। इनके लाखों पद सरकारी विभागों में खाली पड़े हैं। ग्रुप डी में तो कई साल से सरकारी भर्ती हुई ही नहीं, अनुबंध, आउटसोर्सिंग और डीसी रेट पर कर्मी रखकर ही काम चलाया जा रहा है।