पेट की 15 गंभीर बीमारियों का इलाज अब मोबाइल ऐप पर उपलब्ध है। इस pgi gi liver ऐप की सहायता से कोई भी दूर-दराज गांव में बैठा डाक्टर अपने मरीज का लेटेस्ट तकनीक से इलाज कर पाने में सक्षम होगा।
ऐप में बीमारी का लेटेस्ट तरीके से डायग्नोज, इन्वेस्टीगेशन, ट्रीटमेंट और मेडिसिन के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इस ऐप को पीजीआई की गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग की एडिशनल प्रोफेसर ऊषा दत्ता ने तैयार किया है।
उन्होंने बताया कि ऐप में गैस्ट्रोऐंटोलॉजी से संबंधित सभी गाइडलाइंस को अपलोड किया है। उन्होंने बताया कि पहले इसका इस्तेमाल पीजीआई में किया जाएगा। उसके बाद उसे दिसंबर 2014 को इसे नेशनल लेवल पर लॉन्च करने की योजना है।
इस तरह से होगा फायदा
डा. ऊषा दत्ता के मुताबिक इमरजेंसी में आजकल काफी भीड़ रहती है। पेट की इमरजेंसी में तत्काल इलाज की जरूरत पड़ती है। जब डाक्टर के सामने मरीज होता है तो उसके पास इलाज की जानकारी नहीं होती।
जानकारी के लिए उसे किताब, जरनल और इंटरनेट का सहारा लेना पड़ता है, लेकिन ये सब चीजें इमरजेंसी में उपलब्ध नहीं रहती। ऐसे में यदि डाक्टर के पास स्मार्टफोन है तो वह आसानी से इस ऐप की मदद ले सकता है।
ऐप में प्रमुख जानकारियों के साथ दवाओं के डोज, कॉन्फ्रेंस और सीएमई के लेटेस्ट अपडेटों को भी शामिल किया गया है। समय-समय पर ऐप को अपडेट किया जाएगा।
इन बीमारियों के इलाज की जानकारी
लिवर फेल्योर, एक्यूट पेनक्रियाटिटिस, सीवियर अल्सररेटिव कोलाइटिस, एक्यूट कोरोसिव प्वाइजनिंग, खूनी दस्त, लिवर में पानी भर जाना, पित्त की थैली में रुकावट से गॉल ब्लेडर में आने वाली परेशानी, आंत का फट जाना, बच्चों के सिक्के खा लेने और तेजाब पीने सहित कई अन्य बीमारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
छह महीने पहले आया था आइडिया :
डा. उषा दत्ता ने बताया कि छह महीने पहले जब वे इमरजेंसी में एक मरीज का इलाज कर रही थी, तभी उन्हें तत्काल किसी जानकारी की जरूरत पड़ी। इसके लिए उन्हें लिटेचर पढ़ना था, जो इमरजेंसी में तत्काल उपलब्ध हो पाना मुश्किल था।
उसी दौरान उनके दिमाग में ऐसी एप्लीकेशंस बनाने का आइडिया आया, जो हर वक्त डाक्टर के पास मौजूद रहे। पिछले तीन महीने से वे ऐप पर काम कर रही थी। पीजीआई को सेवाएं देने के बाद भी ऐप को तैयार करने में देर रात काम करती रहती थीं।