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Chandigarh News: चेशायर होम से निकाले दिव्यांग अब भी आशियाने के लिए भटक रहे

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चंडीगढ़। सेक्टर-21 स्थित चेशायर होम से बेदखल किए गए दिव्यांगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। यूटी प्रशासन के समाज कल्याण विभाग ने आठ फरवरी को कार्रवाई कर होम खाली करा दिया था लेकिन अब तक सभी दिव्यांगों के लिए स्थायी आश्रय की व्यवस्था नहीं हो सकी है। कुछ नयागांव में एक एनजीओ के पास शरण लिए हुए हैं, कुछ अपने रिश्तेदारों के पास चले गए, जबकि कई अब भी दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
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यूटी प्रशासन के समाज कल्याण विभाग ने 8 फरवरी को सेक्टर-21 के चेशायर होम में पिछले कई वर्षों से रह रहे दिव्यांगों से खाली करा दिया। विभाग ने जिला अदालत के आदेश का हवाला देते हुए सभी दिव्यांगों का सामान घर से बाहर निकाल दिया और घर पर ताला लगा दिया। दिव्यांगों ने अपने वकील के माध्यम से कार्रवाई का विरोध किया। सात घंटे तक हंगामा चलता रहा लेकिन अंत में सभी को घर खाली करना पड़ा। जहां पर चेशायर होम का बोर्ड लगा था, उसे काले रंग से पेंट कर दिया गया है। होम के अंदर जाने के सभी रास्तों पर सामान रखकर बंद कर दिया गया है और मुख्य दरवाजे पर ताला लगा दिया है। कोई ताला न तोड़ सके। इसके लिए सिक्योरिटी गार्ड की भी तैनाती की गई है। हालांकि, उस दिन दिव्यांगों के सामान को बाहर रखा गया था, जिसे बाद में घर के अंदर रख दिया गया और ताला लगा दिया गया है। ऐसे में कुछ दिव्यांगों ने बताया कि उनका सामान, जिसमें कपड़े आदि भी हैं, वो घर के अंदर हैं। उन्हें वह बाहर नहीं ला पा रहे हैं। इसकी वजह से उस दिन से अब तक एक ही कपड़े पहन रखा है।

विभाग ने मरने के लिए छोड़ दियाः अजय
चेशायर होम में रहने वाले पैरा खिलाड़ी अजय ने बताया कि होम से निकाले जाने के बाद वह और उनके कई साथी अभी तक स्थायी निवास के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। चार-पांच दिव्यांगों की व्यवस्था एक एनजीओ ने नयागांव में की है। जहां पर वह रह रहे हैं। कुछ दिव्यांग अपने रिश्तेदारों के पास चले गए हैं। जिनका कोई नहीं है, वह अभी भी परेशान होकर इधर-उधर घूम रहे हैं। अजय ने बताया कि समाज कल्याण विभाग ने उनके साथ गलत किया है। वहां पर चंडीगढ़ के 10 से 12 दिव्यांग रहते थे। उनके पास शहर का आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज हैं। उनके लिए तो विभाग को कम से कम कोई व्यवस्था करनी चाहिए थी, लेकिन उन्हें भी बेघर कर दिया गया है। विभाग ने अब तक किसी दिव्यांग से संपर्क भी नहीं किया, न ही कोई मदद पहुंचाई है। वकील राजेंद्र पांडे व कुछ समाजसेवी संस्थाओं की मदद से वह लोग गुजारा कर पा रहे हैं। विभाग ने उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया है।
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