रास्ता चाहे कितना भी कठिन हो लगन और मेहनत से मंजिल को पाना मुश्किल नहीं है। यह बात मूक बधिर लड़की मल्लिका ने साबित कर दी है। मल्लिका (20) जो न तो सुन और न ही बोल सकती है, उसने शतरंज में एशियन गोल्ड मेडल का खिताब जीता है।
मल्लिका के पिता सुरेश हांडा ने बेटी को हर कदम पर उत्साहित किया। मल्लिका हांडा ने हाल ही में मंगोलिया में हुई एशियन शतरंज चैंपियनशिप में अपना परचम लहराया है।
मल्लिका हांडा जालंधर के खोसला मूक बधिक स्कूल की छात्रा रही है। मल्लिका के पिता सुरेश हांडा ने बताया कि उनकी बेटी में मेहनत से हर काम करती है। उसने पांच साल पहले स्कूल में ही शतरंज खेलना शुरू किया था। इसमें उसका लगन बढ़ता चला गया। सुरेश एक अकाउंटेंट हैं।
पिता ने बेटी को हर कदम पर उत्साहित किया
पिता सुरेश हांडा ने बताया कि उन्होंने मन में ठान रखी थी कि मल्लिका को उस मंजिल पर पहुंचाना है, जहां पर हर कोई देखता ही रह जाए। उसके लिए उन्होंने एक कोच तैनात किया, जो प्रति घंटा एक हजार रुपये लेता था।
बीते साल जर्मनी में अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप हुई, लेकिन सरकार ने मल्लिका को इसके लिए नहीं भेजा। पिता सुरेश ने बताया कि मल्लिका इशारों में उनको हौसला देती थी कि पापा चिंता नहीं करो। इस साल मंगोलिया में एशियन चैंपियनशिप रखी गई थी, जो 8 से 14 अगस्त तक चलनी थी।
इसके लिए उन्होंने पहले ही स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से संपर्क साधना शुरू कर दिया। आखिरकार स्पोर्ट्स अथॉरिटी मल्लिका हांडा को मंगोलिया भेजने के लिए राजी हो गई।
उधर, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एसोसिएशन की ओर से मल्लिका हांडा को पूरा सहयोग देने का वादा किया गया है। साथ ही सरकार से मांग की गई है कि मल्लिका को नौकरी दी जाए।