रास्ता चाहे कितना भी कठिन हो लगन और मेहनत से मंजिल को पाना मुश्किल नहीं है। यह बात मूक बधिर लड़की मल्लिका ने साबित कर दी है। मल्लिका (20) जो न तो सुन और न ही बोल सकती है, उसने शतरंज में एशियन गोल्ड मेडल का खिताब जीता है।
मल्लिका के पिता सुरेश हांडा ने बेटी को हर कदम पर उत्साहित किया। मल्लिका हांडा ने हाल ही में मंगोलिया में हुई एशियन शतरंज चैंपियनशिप में अपना परचम लहराया है।
मल्लिका हांडा जालंधर के खोसला मूक बधिक स्कूल की छात्रा रही है। मल्लिका के पिता सुरेश हांडा ने बताया कि उनकी बेटी में मेहनत से हर काम करती है। उसने पांच साल पहले स्कूल में ही शतरंज खेलना शुरू किया था। इसमें उसका लगन बढ़ता चला गया। सुरेश एक अकाउंटेंट हैं।