उन्होंने कहा कि 1977 में जब देवीलाल सीएम बने थे उस समय भी भाजपा के समर्थन से सरकार बनी थी। इसके अलावा 1982 और 1987 में भी भाजपा और ताऊ देवीलाल का साथ बना रहा है। यह बात अलग है कि 1996 में बंसीलाल की सरकार बनी और भाजपा उनके साथ थी लेकिन मैं यह बात कहने से नहीं चूकूंगा कि हरियाणा में भाजपा का पुराना आधार है। आज फिर से ताऊ देवीलाल का परिवार भाजपा के साथ है।
14 विभाग ऐसे हैं जो मेरे और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पास हैं। ऐसे में मैं यह कहना चाहता हूं कि योगेश्वर की जीत के बाद बरोदा हलके का कोई काम नहीं रुकेगा। इससे पहले दिग्विजय चौटाला ने कहा कि बरोदा हलके का ताऊ देवीलाल के साथ बहुत लंबे समय तक जुड़ाव रहा है। सात बार पहले भी यहां से देवीलाल के कहने पर जनता ने प्रत्याशियों को जितवाया है।
आज आठवीं बार यह पहलवान भी देवीलाल जी के प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरा है। हरियाणा का नाम विश्व के स्तर पर रोशन किया है। ऐसे में जीत पहलवान की झोली में ही आनी चाहिए। यहां लड़ाई कांग्रेस और भाजपा-जजपा गठबंधन में है। कांग्रेस के प्रत्याशी का नाम ही भालू है। ऐसे में मैं यह कहना चाहता हूं कि यह बरोदा का उपचुनाव है कोई चिड़ियाघर नहीं कि भालू, पहलवान को चित कर दे।
इंडियन नेशनल लोकदल बरोदा उपचुनाव में अपने प्रत्याशी के लिए अलग से वोट मांग रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और अभय सिंह चौटाला भी यहां पर देवीलाल की विरासत का हवाला देकर वोट मांग रहे हैं। चौटाला के मैदान में आने से चुनाव रोचक तो हुआ है लेकिन यह विरासत जजपा के खाते में जाएगी या फिर इनेलो के खाते में यह स्थिति चुनाव के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल इनेलो और जजपा दोनों ही दलों ने विरासत को कैश करवाने के लिए बरोदा हलके में डेरा डाल दिया है।
आज से दुष्यंत चौटाला मैदान में उतरेंगे
दुष्यंत चौटाला शुक्रवार से बरोदा के चुनावी रण में उतरेंगे। वे भी यहां पर ताऊ देवीलाल की विरासत को भुनाने के लिए जनता के बीच जाएंगे। दुष्यंत चौटाला की इस उपचुनाव में यह पहली जनसभा होगी, जब वे इस हलके की जनता से रूबरू होंगे। दुष्यंत आज गंगाना, भावड़, मदीना, रुखी और रंभड़ा में जनसभाएं करेंगे उनका यह कार्यक्रम 11 से 5 बजे तक होगा। दुष्यंत के साथ खेल मंत्री संदीप सिंह भी चुनाव प्रचार में रहेंगे।
हवाई पट्टी से लेकर मंच तक रहे दिग्विजय
मुख्यमंत्री मनोहर लाल की जनसभाओं में दुष्यंत चौटाला की अनुपस्थिति के चलते कमान दिग्विजय ने संभाली है। बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी की हवाई पट्टी पर सीएम का हेलीकाप्टर उतरने से पहले दिग्विजय वहां मौजूद थे। मुख्यमंत्री का अभिवादन करने के बाद वे सभी राजनीतिक मंचों पर सीएम के साथ रहे। यहां तक कि गाड़ी में भी सीएम के साथ ही बैठकर जनसभाएं करने पहुंचे।