चंडीगढ़। कुछ दिन पहले चेन्नई में एक रिटायर्ड एलआईसी ऑफिसर को डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगों ने एक करोड़ की ठगी की थी। इस मामले को चंडीगढ़ साइबर क्राइम पुलिस ने सुलझा लिया है। बैंक डिटेल के आधार पर साइबर पुलिस ने राजस्थान के श्री गंगानगर निवासी प्रदीप सिंह और एरोसिटी मोहाली के रहने वाले यशदीप सिंह को गिरफ्तार किया है।
इसकी सूचना पाते ही चेन्नई पुलिस चंडीगढ़ पहुंची। साइबर पुलिस ने दोनों आरोपियों को चेन्नई पुलिस के हवाले कर दिया है। हालांकि, इस मामले का मास्टरमाइंड अभी फरार है। उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है ताकि वह देश छोड़कर न भाग सकेें।
जानकारी के मुताबिक बीते 25 अक्तूबर को चेन्नई के एक सेवानिवृत्त एलआईसी ऑफिसर के पास अज्ञात नंबर से फोन आया और बातचीत करने वाले व्यक्ति ने खुद को सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बताया। उसने कहा कि उसके बैंक खाते से मनी लांड्रिंग से जुड़ी राशि का ट्र्रांजेक्शन हुआ है, इसलिए उसे गिरफ्तार किया जाएगा। इससे सेवानिवृत्त एलआईसी ऑफिसर डर गए। शातिरों ने उसे घर में ही बिना किसी को यह बात बताए डिजिटल अरेस्ट कर रखा। शातिरों ने अपनी बातों में फंसाकर सेवानिवृत्त एलआईसी ऑफिसर से अलग-अलग खातों में करीब एक करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए। खाते में राशि ट्रांसफर होने के कुछ देर बाद ही बुजुर्ग को अपने साथ ठगी का पता चला तो पुलिस को शिकायत दी। चेन्नई पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर किया था।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो पता चला कि जिन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं, वे यूको बैंक की चंडीगढ़ ब्रांच से संबंधित हैं। इसके बाद चेन्नई पुलिस ने चंडीगढ़ की साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क किया और मामले में संयुक्त टीम ने जांच शुरू कर दी। साइबर पुलिस ने बैंक में पहुंचकर खाताधारक की जानकारी ली और मोबाइल नंबर लेकर लोकेशन ट्रेसिंग शुरू की। साइबर टीम ने लाेकेशन के मुताबिक प्रदीप सिंह और यशदीप सिंह काे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। जांच में पता चला है कि यशदीप सिंह पैसे ट्रांसफर करवाने के लिए देवेंद्र सिंह के लिए बैंक खाते मुहैया कराने का काम करता है। इस ठगी में भी प्रदीप को एक लाख रुपये दिए गए थे।