चंडीगढ़। डीआईजी ओमवीर सिंह ने सीबीआई अदालत में शुक्रवार को दो लाख रुपये रिश्वत के मामले में अपना जवाब दायर किया। उन्होंने कहा कि निलंबित एसएचओ जसविंदर कौर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देना अभी भी विचाराधीन है। इस पर विचार किया जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी।
बीते बुधवार को चंडीगढ़ पुलिस के डीआईजी को जसविंदर कौर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने की स्टेटस रिपोर्ट के लिए जवाब दायर करने का निर्देश दिया गया था। 2017 में निलंबित एसआई मोहन सिंह पर दो लाख रुपये की रिश्वत का मामला दर्ज किया गया था, जिसमें जसविंदर कौर को आरोपी बनाने के लिए जीरकपुर निवासी शिकायतकर्ता प्रेम सिंह बिष्ट ने याचिका दायर की थी। याचिका में कहा था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत लोक सेवक के खिलाफ अधिकारी की ओर से मंजूरी के लिए तीन महीने का समय तय होता है, लेकिन इस मामले में पांच महीने बीत चुके हैं, पर अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिसके बाद 13 फरवरी को सीबीआई अदालत ने मामले को आगे बढ़ाने के लिए चंडीगढ़ पुलिस को आरोपी जसविंदर के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। साथ ही अदालत ने सीबीआई को भी निर्देश दिया था कि वह मामले से संबंधित सुबूत और डाटा इकट्ठा कर पेश करे ताकि प्राधिकरण यह तय कर सके कि वह मुकदमा चलाने की मंजूरी दे या नहीं। जसविंदर कौर एक लोक सेवक है और किसी भी लोक सेवक के खिलाफ कोई मुकदमा चलाने के लिए प्राधिकरण की मंजूरी लेना आवश्यक होता है।
बता दें कि इसी मामले में बीते 30 जून को अदालत ने सेक्टर-31 थाना एसएचओ राजदीप सिंह, 39 थाना एसएचओ अमनजोत सिंह, 34 थाना एसएचओ बलदेव सिंह और मनीमाजरा की निलंबित पूर्व एसएचओ जसविंदर कौर के खिलाफ बनती कार्रवाई के आदेश दिए थे। सीबीआई ने जसविंदर कौर को एक अन्य रिश्वत मामले में आरोपी बनाया है, जिसमें वह अभी भी फरार चल रही है। इस मामले में अदालत ने बीते वीरवार को आरोपी जसविंदर कौर के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किए हैं। आरोपी जसविंदर पर पांच लाख रुपये की रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया गया है, जिसमें अन्य बिचौलिए पुलिसकर्मी भगवान सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है।