डायल 112 को आप अच्छी तरह याद कर लीजिए, क्योंकि पुलिस, फायर और स्वास्थ्य से जुड़ी आपात सेवाएं पाने को अब यही नंबर डायल करना होगा। शुक्रवार को इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित हयात होटल में इस सर्विस को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लांच किया। इस सेवा के शुरू होने के बाद अब से चंडीगढ़ में इमरजेंसी में मदद के लिए अलग-अलग नंबर याद रखने की जरूरत नहीं होगी।
अभी तक पुलिस (100), अस्पताल (108), वुमन हेल्पलाइन नंबर (1090) और फायर स्टेशन (101) जैसे जरूरी नंबरों को अलग-अलग सेव किया करते थे, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुंरत सहायता मिल सके, लेकिन अब ये सारी सुविधाएं सिर्फ 112 नंबर डायल करने से मिल जाएंगी। इसकी लांचिंग के मौके पर शाह ने चंडीगढ़ पुलिस की ओर से तैयार किए गए ई-बीट बुक और ई-साथी एप को भी लांच किया।
शाह ने चंडीगढ़ पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि ई-बीट को इमरजेंसी नंबर 112 से जोड़ने वाला चंडीगढ़ पहला शहर है। डीजीपी संजय बेनीवाल ने कहा कि यह एक प्रयास है कि लोगों को जल्दी और प्रभावी मदद मिल सके। वीरवार को 112 नंबर का ट्रायल किया गया। ट्रायल के दौरान आग लगने की एक वास्तविक घटना की कॉल आई। तुरंत इसके लिए संबंधित विभागों को सूचित किया गया और मात्र 4 मिनट में घटनास्थल पर मदद पहुंची, जोकि पहले औसतन 12 मिनट होता था।
कैसे काम करेगा 112
चंडीगढ़ सेक्टर-9 स्थित पुलिस हेडक्वार्टर में बनाए 112 कॉमन कंट्रोल रूम से डायल नंबर 100 (पुलिस), 101 (फायर) और 108 (एंबुलेंस) सर्विस को जोड़ा गया है। कंट्रोल रूम में इन सभी हेल्पलाइन के कर्मचारियों का भी डेस्क बनाया गया है। जहां इनके कर्मचारी भी बैठकर कॉल अटैंड कर आगे की कार्रवाई के लिए सूचित करेंगे।
112 मास्टर नंबर
डायल 112 पर केवल घटना की ही शिकायत दर्ज नहीं होगी बल्कि फायर स्टेशन, एंबुलेंस की उपलब्धता से लेकर महिला उत्पीड़न संबंधी शिकायत पर भी यह नंबर डायल कर सकते हैं। हालांकि, इन सभी सुविधाओं के लिए अलग टोल फ्री नंबर है। यदि किसी दशा में उन सुविधाओं के नंबर पर संपर्क नहीं हो पाता है तो यह नंबर ही मास्टर नंबर का कार्य करेगा। गौरतलब है कि अमेरिका में 911 ऑल-इन-वन आपातकालीन सेवा के पैटर्न पर एक ही नंबर की योजना बनाई गई है, जोकि वहां काफी कारगर साबित हो रहा है।
अब पुलिस थाने की सारी सुविधा ई-साथी एप पर
डीजीपी संजय बेनीवाल ने कहा कि ई-साथी एप पुलिस थानों को लोगों के घर तक पहुंचाएगा। इसमें मुख्य रूप से 6 सुविधाएं प्रदान की गई हैं। इसमें लोग अपने आसपास की समस्याएं पुलिस के साथ साझा कर सकेंगे। साथ ही एप में शिकायत करने का भी ऑप्शन दिया गया है। लोग अब एप की मदद से सर्वेंट वेरिफिकेशन के लिए रिक्वेस्ट डाल सकेंगे, जिसके बाद पुलिस खुद घर आकर वेरिफिकेशन करेगी। इसके अलावा अन्य वेरिफिकेशन की सुविधा एप पर ही मौजूद होगी। डीजीपी ने कहा कि यह अपने आप में सबसे अलग परियोजना है। शिकायत सिर्फ बीट अधिकारी के पास ही नहीं बल्कि सीनियर अधिकारियों के पास भी जाएगी।
ई-बीट बुक से पुलिस क्राइम पर करेगी कंट्रोल
गृहमंत्री ने ई-बीट बुक एप की पांच बीट इंचार्ज को एंड्राइड मोबाइल सौंपकर शुरुआत की। ई-बीट बूथ सिस्टम से जुड़े हर बीट इंचार्ज को एंड्राइड मोबाइल व टैबलेट दिए गए हैं। यह सिर्फ मोबाइल व टैबलेट नहीं हैं, बल्कि पूरी पुलिसिंग इसके अंदर है। क्लिक करते ही शहर से जुड़ी हर जानकारी मिल जाएगी। एरिया में ज्वैलर्स की शॉप कितनी हैं, कहां हैं, मार्केट कहां, शॉप, शराब के ठेके कहां और कितने इस तरह से हर तरह की जानकारी क्लिक पर होंगी। इतना ही नहीं, एप पर अपराधी और उसका पूरा काला चिट्ठा यानी रिकॉर्ड भी होगा। नाके पर बीट इंचार्ज अपराधियों का डाटा देखकर तुरंत एक्शन ले सकता है।